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रविवार, 21 फ़रवरी 2010

“ये कविता नही… भाव हैं” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

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जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए,
दे रहे हैं हमें शुद्ध-शीतल पवन!
खिलखिलाता इन्हीं की बदौलत सुमन!!
रत्न अनमोल हैं ये हमारे लिए,
जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए,

आदमी के सितम-जुल्म को सह रहे,
परकटे से तने निज कथा कह रहे,
कर रहे हम इन्हीं का हमेशा दमन!
सह रहे ये सभी कुछ हमारे लिए,
जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए,

कर रहे जड़-जगत पर ये उपकार हैं,
वन सभी के लिए मुफ्त उपहार हैं,
रोग और शोक का होता इनसे शमन!
दूत हैं ये धरा के हमारे लिए,
जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए,

ये हमारी प्रदूषित हवा पी रहे,
घोटकर हम इन्ही को दवा पी रहे,
देवताओं का हम कर रहे हैं दमन!
तन हवन कर रहे ये हमारे लिए,
जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए,

16 टिप्‍पणियां:

  1. खिलखिलाता इन्हीं की बदौलत सुमन.nice

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  2. कर रहे जड़-जगत पर ये उपकार हैं,
    वन सभी के लिए मुफ्त उपहार हैं॥
    वाह बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! पेड़ पौधे हैं इसलिए हम सब जीवित है पर देखा जाये तो आजकल चारों ओर कांक्रीट का जंगल दिखाई देता है! पर अब तो ज़्यादातर पेड़ पौधे काट दिए जाते हैं और ऊँची इमारतें बनाई जाती है!

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut hi prerak sandesh diya hai bas insaan ko hi ye baat samajh nhi aati.

    उत्तर देंहटाएं
  4. शास्त्री जी बहुत ही बढ़िया कविता. इस कविता की प्रत्येक लाइन कुछ ना कुछ सन्देश डे रही है. इसलिए सोच रहा हूँ की किस पंक्ति की तारिक करूँ और किस को छोड़ दूँ. बावजूद इसके आपके भावो को जो शब्द मिले है उसके लिए आप बधाई के पात्र है. आपको भी पता है की मैं भी ऐसे ही कुछ भावो से गुफ्तगू करता रहता हूँ.
    www.gooftgu.blogspot.com

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  5. बहुत प्रेरक प्रसग, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  6. सत्य वचन. पेड़ पौधे अमूल्य उपहार हैं. हम लोग ही इनकी वकत नहीं समझते.

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  7. बहुत ही अच्छी ओर प्रेरक देने वाली आप की यह रचना.धन्यवाद

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  8. बहुत सुन्दर, हमेशा की तरह प्रेरणा देती हुई रचना.

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  9. बहुत सुन्दर भाव .... प्रेरक रचना ...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  10. वनों के महत्त्व को बहुत खूबसूरती से लिखा है..सुन्दर रचना..पर्यावरण के प्रति जागरूक करती हुई...

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुंदर भाव के साथ...बहुत सुंदर कविता....

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  12. कर रहे जड़-जगत पर ये उपकार हैं,
    वन सभी के लिए मुफ्त उपहार हैं,
    रोग और शोक का होता इनसे शमन!

    सच कहा है शास्त्री जी .. ये बस देना जानते हैं .. इनकी रक्षा सबको करनी है ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. दूत हैं ये धरा के हमारे लिए,
    जी रहे पेड़-पौधे हमारे लिए,

    उत्तर देंहटाएं
  14. जी रहे हम इनके कारण ही ....
    प्रकृति को समर्पित बहुत प्रेरक रचना ....!!

    उत्तर देंहटाएं

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