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गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

“अब बसन्त आया है!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

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उपवन मुस्काया है!


अब बसन्त आया है!



कुहासे की चादर,


धरा से छँट गई।


फैली हुई धवल रुई,


गगन से हट गई।


उपवन मुस्काया है!


अब बसन्त आया है!



सूर्य की रश्मियों से,


दिवस प्रकाशित हैं।


वासन्ती सुमनों से ,


तन-मन सुवासित हैं।


उपवन मुस्काया है!


अब बसन्त आया है!



होली का उल्लास है,


आँगन-चौराहों पर।


चहल-पहल नाचती है,


पगदण्डी-राहों पर।।


उपवन मुस्काया है!


अब बसन्त आया है!



गुनगुनी धूप ने,


मोर्चे सम्भाले हैं।


पर्वत भी छोड़ रहे,


बर्फ के दुशाले हैं।


उपवन मुस्काया है!


अब बसन्त आया है!


(चित्र गूगल सर्च से साभार)

9 टिप्‍पणियां:

  1. वसंत पर एक और धूम मचाती कविता...
    लगता है आप एक कविता संग्रह ही वसंत पर निकाल रहे हैं.. :)
    अच्छा रहेगा.. अपने आप में अनूठा होगा ये संग्रह.
    जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बसंत के आगमन का वर्णन बहुत ही सुंदर अंदाज में..बढ़िया लगा बधाई शास्त्री जी..कविता बढ़िया लगी

    उत्तर देंहटाएं
  3. "शब्द चयन शानदार है, लेकिन भोपाल में सुबह बारिश हुई है लिहाज़ा यहाँ पर बसंत दूर है पलाश के अते-पते ही नहीं हैं लगता है गर्म पानी से होली मनेगी।"
    प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. सही बात है. आम भी बौरा गये हैं. बसन्त आ गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. मौसम ने कवियों से
    गीत मधुर रचवाए!
    भौंरों ने कलियों के
    घूँघट हैं उठवाए!
    उपवन मुस्काया है,
    लो वसंत आया है!

    --
    कह रहीं बालियाँ गेहूँ की - "मेरे लिए,
    नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा!"
    --
    संपादक : सरस पायस

    उत्तर देंहटाएं
  6. प्रक्रिती का इतना मनमोहक चित्रण...........बहुत सुन्दर रचना!!
    सादर
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  7. aapki rachna ne to poora mahol vasantik kar diya............bahut sundar

    उत्तर देंहटाएं

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