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शनिवार, 24 सितंबर 2011

"दोहा छन्द प्रसिद्ध" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 
तेरह-ग्यारह से बना, दोहा छन्द प्रसिद्ध।
सरस्वती की कृपा से, मुझको है यह सिद्ध।१।

चार चरण-दो पंक्तियाँ, करती गहरी मार।
कह देती संक्षेप में, जीवन का सब सार।२।

सरल-तरल यह छन्द है, बहते इसमें भाव।
दोहे में ही निहित है, नैसर्गिक अनुभाव।३।

तुलसीदास-कबीर ने, दोहे किये पसन्द।
दोहे के आगे सभी, फीके लगते छन्द।४।

दोहा सज्जनवृन्द के, जीवन का आधार।
दोहों में ही रम रहा, सन्तों का संसार।५।

26 टिप्‍पणियां:

  1. चार चरण-दो पंक्तियाँ, करती गहरी मार।
    कह देती संक्षेप में, जीवन का सब सार।२।
    ..बहुत ही खुबसूरत दोहा छन्द...

    उत्तर देंहटाएं
  2. इन्ही दोहों में संस्कृति का सारा ज्ञान छिपा है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. vaah....doho me hi doho ki pratima ka varnan....bahut behtreen.

    उत्तर देंहटाएं
  4. तुलसीदास-कबीर ने, दोहे किये पसन्द।
    दोहे के आगे सभी, फीके लगते छन्द।४।

    दोहा सज्जनवृन्द की, भक्ति का आधार।
    दोहों में ही रम रहा, सन्तों का संसार।५।
    वाह शानदार दोहे……………गज़ब की प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी काव्य रचना के आगे तो सब फीका लगता है।
    उम्दा दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाकयी में दोहे छन्‍द का कोई मुकाबला नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  7. गुरुजन के आशीष से, रच देता मति-मन्द |
    गागर में सागर भरे, दोहा सुन्दर छंद ||

    सुन्दर प्रस्तुति पर बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  8. जी हाँ शास्त्री जी दोहे की महिमा अपरम्पार है तभी तो हमारे महान कवियों ऩे सारा ज्ञान उनके माध्यम से दिया है

    उत्तर देंहटाएं
  9. दोहों में दोहे....
    वाह सर बहुत बढ़िया..
    सादर..

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही खुबसूरत रचना ....आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ही खुबसूरत रचना ....आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  12. दोहों पर दोहों में ही कहना ..
    रोचक!

    उत्तर देंहटाएं
  13. तेरह-ग्यारह से बना, दोहा छन्द प्रसिद्ध।
    सर,तेरह-ग्यारह का नियम स्पष्ट करने की कृपा करेंगे तो मैं भी कुछ सीख लूँगी|
    दोहों में दोहे का महत्व बहुत शानदार लग रहा है|
    सादर
    ऋता

    उत्तर देंहटाएं
  14. पांचों दोहे आपके,आये बहुत पसंद.
    अच्छे लगते हैं मुझे,सचमुच दोहा छंद.

    उत्तर देंहटाएं
  15. तेरह-ग्यारह से बना, दोहा छन्द प्रसिद्ध।
    सरस्वती की कृपा से, मुझको है यह सिद्ध।१।

    वैसे उपर्युक्त पहले दोहे पर ये निवेदन ज़रूर है कि:-

    "मुझको है यह सिद्ध" में,अहंकार का भाव.
    ऐसे कथनों से इन्हें,माँ शारदे बचाव.

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सुन्दर दोहा लिखा है आपने! बेहतरीन प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  17. दोहों की ही तरह,एकदम संक्षिप्त और अर्थ-संप्रेषक .

    उत्तर देंहटाएं
  18. चार चरण-दो पंक्तियाँ, करती गहरी मार।
    कह देती संक्षेप में, जीवन का सब सार।
    दोहों में दोहे का महत्व बहुत शानदार.....

    उत्तर देंहटाएं
  19. आदरणीय कुँवर कुसुमेश जी!
    मैं बहुत ही विनम्रता से आपसे निवेदन करना चाहता हूँ कि-
    पांचों दोहे आपके,आये बहुत पसंद.
    अच्छे लगते हैं मुझे,सचमुच दोहा छंद.
    इस दोहे में भी प्रथम चरण में एक मात्रा बढ़ी हुई है।
    --
    "मुझको है यह सिद्ध" में,अहंकार का भाव.
    ऐसे कथनों से इन्हें,माँ शारदे बचाव.
    और इस दोहे के भी तीसरे चरण में एक मात्रा अधिक हो रही है।
    --
    अन्त में यही कहना चाहता हूँ कि-
    "जिसके सिर पर हो सदा, माता का आशीष।
    वो ही तो कहलाएगा,वाणी का वागीश।।"

    उत्तर देंहटाएं
  20. सचनुच आप दोहों में सिद्ध हैं

    उत्तर देंहटाएं

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