प्रेम दिवस पर लीजिए, व्रत जीवन में धार। पल-पल,हर पल कीजिए, सच्चा-सच्चा प्यार।१। |
चहक रहे हैं बाग में, कलियाँ-सुमन अनेक। धीरज और विवेक से, चुनना केवल एक।२। |
जब विचार का मेल हो, समझो तभी बसन्त। पल-प्रतिपल मधुमास है, समझो आदि न अन्त।३। |
सुख सरिता बहती रहे, धार न हो अवरुद्ध। निशि-दिन प्रेम प्रवाह से, इसको करो समृद्ध।४। |
दिल से मत तजना कभी, प्रीत-रीत उदगार। सारस से यह सीख लो, क्या होता है प्यार।५। |
चिकनी-चुपड़ी पर कभी, मत टपकाओ लार। सोच-समझकर ही सदा, देना कुछ उपहार।६। |
कंकड़-काँटों से भरी, नहीं राह अनुकूल। लेकर प्रीत कुदाल को, सभी हटाना शूल।७। |
केशर-क्यारी को सदा, स्नेह सुधा से सींच। पुरुष न होता उच्च है, नारि न होती नीच।८। |
पत्नी, पुत्री, बहन का, मात-पिता का प्यार। उनको ही मिलता सदा, जिनका हृदय उदार।९। |
अपने बिल में सर्प भी, चलता सीधी चाल। कदम-कदम पर बुन रहा, मानुष फिर क्यों जाल।१०। |
बेटी-बेटे में करो, समता का व्यवहार। बेटी ही संसार की, होती सिरजनहार।११। |
पश्चिम की है सभ्यता, प्रेमदिवस का वार। लेकिन अपने देश में, प्रतिदिन प्रेम अपार।१२। |
जीवनभर ना मिट सके, बरसाओ वह रंग। सिखलाओ संसार को, प्रेम-प्रीत का ढंग।१३। |
आडम्बर से युक्त है, प्रेमदिवस का खेल। चमक-दमक में खो गया, सुमनों का ये मेल।१४। |
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29 comments:
पश्चिम की है सभ्यता, प्रेमदिवस का वार।
लेकिन अपने देश में, प्रतिदिन प्रेम अपार...
बहुत सुन्दर शास्त्री जी...
सभी एक से बढ़ कर एक...
सादर नमन.
bahut behtreen,utkrashth shreshth dohe sabhi prernadayak.
वाह जवाब नहीं ...बहुत बहुत अच्छे दोहे..
आपकी लेखनी में जादू है ..
kalamdaan.blogspot.in
जब विचार का मेल हो, समझो तभी बसन्त।kitna achcha likhe hain....
सभी दोहे सटीक संदेश देते हुये
सार्थकता लिए हुए बेहतरीन प्रस्तुति ।
कल 15/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है !
क्या वह प्रेम नहीं था ?
धन्यवाद!
प्रेमदिवस पर सच्चा प्रेम सन्देश ....
आभार!
अच्छी सच्ची सीख..
बहुत अच्छे दोहे..
बहुत अच्छे दोहे| धन्यवाद|
सीख देते सभी दोहे अतिसुंदर...
पश्चिम की है सभ्यता, प्रेमदिवस का वार,
लेकिन अपने देश में, प्रतिदिन प्रेम अपार.
अति सुन्दर मोती .
बहुत सुंदर प्रस्तुति ,लाजबाब दोहे,....
MY NEW POST ...कामयाबी...
prem par sundar dohe
prem par sundar dohe
पश्चिम की है सभ्यता, प्रेमदिवस का वार।
लेकिन अपने देश में, प्रतिदिन प्रेम अपार।
sach hain ji ....
बेहतरीन दोहे...
चौदह के चौदह सुन्दर...
//पश्चिम की है सभ्यता, प्रेमदिवस का वार।
लेकिन अपने देश में, प्रतिदिन प्रेम अपार।१२।
sabhi ek se badhkar ek hai sirji.. par ye waala aaj k mere mood se bilkul mel khaa gaya isliye dil ko kuch zyada hi bha gaya :)
१४ दमदार दोहे एक से बढकर एक.. लेकिन १२ वें और १४ वें ने अपना दिल जीत लिया...
एक से बढ़ कर एक दोहे.....
पत्नी, पुत्री, बहन का, मात-पिता का प्यार।
उनको ही मिलता सदा, जिनका हृदय उदार...
चिकनी चुपड़ी पर मत टपकाओ लार !
सुनायी सबको खरी -खरी !
bahut sundar rachna...
ek se badh kar ek...:)
सच है..एक से बढ़ कर एक है सभी....
लाजवाब सटीक व शानदार दोहे।
सुन्दर दोहे सर....
सादर.
बहुत सुंदर दोहे...
सुन्दर विचार और सही सीख देते दोहे.
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