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मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

"टूटे तारे अनन्त देखें हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


(चित्र गूगल छवियों से साभार)
हमने कितने बसन्त देखें हैं
खिलते गुंचों के अन्त देखे हैं

जो तरसते हैं शब्द बनने को
अक्षरों में हलन्त देखे हैं

ऐश करते हैं जो फ़कीरी में 
हमने ऐसे महन्त देखें हैं

सत्य की राह दिखाने वाले
पथ भटकते से सन्त देखें हैं

खुद को माहताब समझने वाले
टूटे तारे अनन्त देखें हैं

भोली सूरत से जो लुभाते हैं
रूप ऐसे दिगन्त देखे हैं

22 टिप्‍पणियां:

  1. सुबह सुबह एक सुन्दर कविता पढ़कर मन प्रसन्न हो गया.

    उत्तर देंहटाएं
  2. ऐश करते हैं जो फ़कीरी में
    हमने ऐसे महन्त देखें हैं

    सत्य की राह दिखाने वाले
    पथ भटकते से सन्त देखें हैं
    Sateek baat !

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुबह सुबह इतनी सुन्दर कविता पढ़कर आनंद आ गया.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बहुत सुन्दर !
    kalamdaan.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  5. भोली सूरत से जो लुभाते हैं
    “रूप” ऐसे दिगन्त देखे हैं

    सुंदर प्रस्तुति ....

    उत्तर देंहटाएं
  6. सत्य की राह दिखाने वाले
    पथ भटकते से सन्त देखें हैं...बहुत सुन्दर सटीक प्रस्तुति..

    उत्तर देंहटाएं
  7. जो तरसते हैं शब्द बनने को
    अक्षरों में हलन्त देखे हैं

    सत्य की राह दिखाने वाले
    पथ भटकते से सन्त देखें हैं

    खुद को माहताब समझने वाले
    टूटे तारे अनन्त देखें हैं

    वाह …………शानदार प्रस्तुतिकरण्।

    उत्तर देंहटाएं
  8. kavita ki saare gun samaaye hai in shbdkram mein..
    जो तरसते हैं शब्द बनने को
    अक्षरों में हलन्त देखे हैं...waah es pankti ke to kya kahne....

    उत्तर देंहटाएं
  9. टूटे तारों का विश्व कोई,
    हम ढूढ़ें सुखद भविष्य कोई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. ऐश करते हैं जो फ़कीरी में
    हमने ऐसे महन्त देखें हैं
    दार्शनिक भाव की रचना कितने पात्र सजीव कर गई .

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुन्दर प्रस्तुति, शानदार रचना ।
    मेरी नई रचना देखें-
    मेरी कविता:आस

    उत्तर देंहटाएं
  12. ऐश करते हैं जो फ़कीरी में
    हमने ऐसे महन्त देखें हैं

    सत्य की राह दिखाने वाले
    पथ भटकते से सन्त देखें हैं

    bahut khoob dadu...

    उत्तर देंहटाएं
  13. हर लफ्ज़ सच्चाई बयाँ करता हुआ ..... मुबारक कबूल करें!

    उत्तर देंहटाएं
  14. //जो तरसते हैं शब्द बनने को
    अक्षरों में हलन्त देखे हैं
    As always sirji..gazab :)

    उत्तर देंहटाएं
  15. ...जो तरसते हैं शब्द बनने को
    अक्षरों में हलन्त देखे हैं

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

    उत्तर देंहटाएं
  16. सत्य की राह दिखाने वाले
    पथ भटकते से सन्त देखें हैं ...

    बहुत सुन्दर रचना ... हर छंद सत्य को बयान कर रहा है ...

    उत्तर देंहटाएं

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