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शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

"प्रतिज्ञादिवस में प्रतिज्ञा कहाँ है?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


प्रतिज्ञादिवस में प्रतिज्ञा कहाँ है?
प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है।।

छाया हुआ रूप का ही नशा है,
जवानी में उन्माद ही तो बसा है,
दिखावे ने अपना शिकंजा कसा है,
प्रतिज्ञादिवस में प्रतिज्ञा कहाँ है?
प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है।।

बिना स्नेह के दीप कैसे जलेगा?
बिना प्यार के कैसे पादप पलेगा?
कभी वासना से न जीवन चलेगा,
प्रतिज्ञादिवस में प्रतिज्ञा कहाँ है?
प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है।।

दिखावा हटाओ, जियो ज़िन्दगी को,
दिलों से मिटाओ, मलिन-गन्दगी को,
अगर प्यार है तो, करो बन्दगी को,
प्रतिज्ञादिवस में प्रतिज्ञा कहाँ है?
प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है..

    बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  2. दिलों से मिटाओ, मलिन-गन्दगी को,
    अगर प्यार है तो, करो बन्दगी को,

    साधु-साधु'

    अतिसुन्दर....

    उत्तर देंहटाएं
  3. गहरा मन्त्र है, प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. अति सुन्दर...्शास्त्री जी..आभार..

    उत्तर देंहटाएं
  5. दिखावा हटाओ, जियो ज़िन्दगी को,
    दिलों से मिटाओ, मलिन-गन्दगी को,
    अगर प्यार है तो, करो बन्दगी को,
    प्रतिज्ञादिवस में प्रतिज्ञा कहाँ है?
    प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है।…………………सही कहा ………सुन्दर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  6. दिखावा हटाओ, जियो ज़िन्दगी को,
    दिलों से मिटाओ, मलिन-गन्दगी को,
    अगर प्यार है तो, करो बन्दगी को,

    बहुत सुन्दर भाव,,

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  7. छाया हुआ रूप का ही नशा है,
    जवानी में उन्माद ही तो बसा है,

    दिखावे ने अपना शिकंजा कसा है,
    दिखावा हटाओ, जियो ज़िन्दगी को,
    दिलों से मिटाओ, मलिन-गन्दगी को,

    अगर प्यार है तो, करो बन्दगी को,

    बहुत सार्थक चित्र प्रधान पंक्तियाँ 'वर्तमान 'चलन का खाका खींचती .

    उत्तर देंहटाएं
  8. प्रतिज्ञा केवल उसी दिवस के लिए.... ३६४ दिवस आज़ादी के :)

    उत्तर देंहटाएं
  9. सही चिंतन, मन का मंथन, सार्थक विचार।

    उत्तर देंहटाएं
  10. आज 12/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  11. दिखावा हटाओ, जियो ज़िन्दगी को,
    दिलों से मिटाओ, मलिन-गन्दगी को,

    बहुत सुन्दर सर...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं

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