हर्षित होकर राग भ्रमर ने गाया है! लगता है बसन्त आया है!! नयनों में सज उठे सिन्दूरी सपने से, कानों में बज उठे साज कुछ अपने से, पुलकित होकर रोम-रोम मुस्काया है! लगता है बसन्त आया है!! खेतों ने परिधान बसन्ती पहना है, आज धरा ने धारा नूतन गहना है, आम-नीम पर बौर उमड़ आया है! लगता है बसन्त आया है!! पेड़ों ने सब पत्र पुराने झाड़ दिये हैं, वैर-भाव के वस्त्र सुमन ने फाड़ दिये है, होली की रंगोली ने मन भरमाया है! लगता है बसन्त आया है!! (चित्र गूगल सर्च से साभार) |
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waah aapka vasantik geet padhkar sari thakaan door ho gayi.
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर गीत.
जवाब देंहटाएंरामराम.
हाँ जी बसन्त आया है। बढिया।
जवाब देंहटाएंपेड़ों ने सब पत्र पुराने झाड़ दिये हैं,
जवाब देंहटाएंवैर-भाव के वस्त्र सुमन ने फाड़ दिये है.nice
पेड़ों ने सब पत्र पुराने झाड़ दिये हैं,
जवाब देंहटाएंवैर-भाव के वस्त्र सुमन ने फाड़ दिये है,
होली की रंगोली ने मन भरमाया है!
लगता है बसन्त आया है!!
बढ़िया शास्त्री जी !
बहुत मनभावन बसंत गीत....
जवाब देंहटाएंsundar basant geet..
जवाब देंहटाएंsahi kahaa ji guru ji...
जवाब देंहटाएंaa gaya basant....
मुझे तो कन्फर्म हो चुका है कि आया है.
जवाब देंहटाएंaaya hai ji aaya hai
जवाब देंहटाएंmaine bhi anubhav kiya hai........
वसंत आया ही नहीं,
जवाब देंहटाएंसब तरफ छाया भी है
और
हर मन को भाया भी है!
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कह रहीं बालियाँ गेहूँ की –
"नवसुर में कोयल गाता है, मीठा-मीठा-मीठा!
श्रम करने से मिले सफलता,परीक्षा सिर पर आई!"
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संपादक : सरस पायस
बहुत मनभावन बसंत गीत....
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर लगा आप का यह बसन्त गीत.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
Prakrati ka iatana chundar chitran karane me aapki lekhani prakhar hai...bahut sundar basant geet!
जवाब देंहटाएंSadar