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रविवार, 12 सितंबर 2010

“700 वाँ पुष्प” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

भारत माँ के मधुर रक्त को, 

कौन राक्षस चाट रहा?”

आज देश में उथल-पुथल क्यों,
क्यों हैं भारतवासी आरत?
कहाँ खो गया रामराज्य,
और गाँधी के सपनों का भारत?
आओ मिलकर आज विचारें,
कैसी यह मजबूरी है?
शान्ति वाटिका के सुमनों के,
उर में कैसी दूरी है?
क्यों भारत में बन्धु-बन्धु के,
लहू का आज बना प्यासा?
कहाँ खो गयी कर्णधार की,
मधु रस में भीगी भाषा?
कहाँ गयी सोने की चिड़िया,
भरने दूषित-दूर उड़ाने?
कौन ले गया छीन हमारे,
अधरों की मीठी मुस्काने?
किसने हरण किया गान्धी का,
कहाँ गयी इन्दिरा प्यारी?
प्रजातन्त्र की नगरी की,
क्यों आज दुखी जनता सारी?
कौन राष्ट्र का हनन कर रहा,
माता के अंग काट रहा?
भारत माँ के मधुर रक्त को,
कौन राक्षस चाट रहा?

21 टिप्‍पणियां:

  1. भारत माँ के मधुर रक्त को,
    कौन राक्षस चाट रहा?
    एक सामयिक पोस्ट देश की स्थिति का आकलन करती हुई वैसे जब घर में ही राक्षस हों तो ये तो होना ही था

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति के प्रति मेरे भावों का समन्वय
    कल (13/9/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
    और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. कहाँ गयी सोने की चिड़िया,
    भरने दूषित-दूर उड़ाने?
    कौन ले गया छीन हमारे,
    अधरों की मीठी मुस्काने?
    bahut hi sundar!

    उत्तर देंहटाएं
  4. शास्त्री जी ,

    आपको सात सौंवें पुष्प की बधाई ...

    भारत की सही विवेचना की है इस रचना में ..

    उत्तर देंहटाएं
  5. आज के हालात को प्रस्तुत करती सुन्दर रचना, एवम ७०० वी पोस्ट की ढेर सारी बधाइयां शाश्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  6. सबसे पहले तो 700 वीं पोस्ट की हार्दिक बधाई।
    आज के हालात का सटीक चित्रण किया है……………ये दर्द तो आज हर दिल मे पल रहा है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बधाईयां ही बधाईयां, सात सौ बधाईयां जी.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. कहाँ गयी सोने की चिड़िया,
    भरने दूषित-दूर उड़ाने?
    कौन ले गया छीन हमारे,
    अधरों की मीठी मुस्काने?

    बेहतरीन ....बहुत बहुत बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  9. देश की स्थिति को आपने बहुत ही सुन्दरता से प्रस्तुत किया है! उम्दा रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  10. 700 पुष्पों से सुसज्जित बगिया में नित नये पुष्प खिलें और बगिया को महकायें..अनेक शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  11. सात सौवीं पोस्ट...सात सौ गुना बेहतर...
    यानि सात सौवाँ पुष्प...सात सौ गुना सुन्दर...

    उत्तर देंहटाएं
  12. सात सौ से सात हज़ार और सात लाख भी होते देखें हम - यही आशा है।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत अच्छी प्रस्तुति। बहुत बहुत बधाई ! अनन्त शुभकामनाएं ।

    उत्तर देंहटाएं
  14. अतिशय बधाई। बहुत सुन्दर कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  15. भारत माँ के मधुर रक्त को,
    कौन राक्षस चाट रहा?
    ये चिंता और ये सारे प्रश्न निरर्थक नहीं गुरुवर,
    आपकी लेखनी को नमन है .
    यहाँ भी पधारे ...
    http://anushkajoshi.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  16. ऎसे कई ७०० पुष्पो का इन्त्ज़ार . बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  17. क्या बात कही है आपने....
    एकदम सटीक और सार्थक....

    मन को छूती उद्वेलित करती अतिसुन्दर रचना....

    उत्तर देंहटाएं
  18. भारत की सही स्थिति दर्शाई है इस कविता में आपको
    700 रचनाओं की बहुत बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं

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