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गुरुवार, 9 सितंबर 2010

“मैंने पकड़ा आभूषण : एमिली डिकिंसन” (अनुवादक:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)


I held a jewel : Emily Dickinson
अनुवादक : डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”
मैंने
अपनी अंगुलियों में
पकड़ा
एक आभूषण
और इसको लेकर
मैं चला गया
अपने शयनकक्ष में
सोने के लिए
दिन गर्म था
हवा मंद थी
निद्रा में
मैंने कहा 
इस गहने को
मैं रखूँगा
सदैव अपने पास
तभी मैं
जग गया अनायास
मैंने देखा
गहने से
मणि की चमक
जा चुकी थी 
अब मैंने डाँटा
अपनी ईमानदार
अंगुलियों को
जिनमें था
नीलम का स्मरण…
“मैंने पकड़ा आभूषण”
Emily Dickinson

जन्म 10 दिसम्बर, 1830     
मृत्यु 15 मई, 1886

20 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया भावपूर्ण रचना ..सुंदर अनुवाद के लिए धन्यवाद शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  2. जितनी सुन्दर कविता, उतना ही सुन्दर भावानुवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर अनुवाद मे भाव मय रचना पढवाने के लिये धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस सुन्दर अनुवाद के लिये आप का धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  5. भावपूर्ण .. सुंदर अनुवाद के लिए धन्यवाद ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. इस अनुवाद के लिये बहुत आभार.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बहुत सुन्दर अनुवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  8. आप की रचना 10 सितम्बर, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपनी टिप्पणियाँ और सुझाव देकर हमें अनुगृहीत करें.
    http://charchamanch.blogspot.com


    आभार

    अनामिका

    उत्तर देंहटाएं
  9. अच्छी कविता, और अनुवाद के बाद भी मूल मिल गया ये ज्यादा अच्छा रहा।

    उत्तर देंहटाएं
  10. अनुवाद के लिए बहुत सुन्दर रचना का चयन किया शास्त्री जी ! इतने भावपूर्ण अनुवाद के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार !

    उत्तर देंहटाएं

  11. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

    उत्तर देंहटाएं
  12. भावपूर्ण रचना, सुंदर अनुवाद के लिए धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं

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