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गुरुवार, 23 सितंबर 2010

“आँसू का अस्तित्व… ..” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

 जब आता है दुःख तभी,
लोचन तन-मन धोता है।
आँसू का अस्तित्व,
नहीं सागर से कम होता है।।

हार नही मानी जिसने,
बहती नदियों-नहरों से,
जल को लिया समेट स्वयं,
गिरती-उठती लहरों से,
रत्न वही पाता है जो, 
मंथक सक्षम होता है।
आँसू का अस्तित्व,
नहीं सागर से कम होता है।। 


जो फूलों के संग काँटों को,
सहन किये जाता है,
जो अमृत के साथ गरल का,
घूँट पिये जाता है,
शीत, ग्रीष्म और वर्षा में,
वो नहीं असम होता है।
आँसू का अस्तित्व,
नहीं सागर से कम होता है।।

24 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना... आपकी शरण में आना ही पड़ेगा...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर रचना... आपकी शरण में आना ही पड़ेगा...

    उत्तर देंहटाएं
  3. जय हो आपकी........
    बहुत सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  4. शास्‍त्री जी आजकल तो गजब ही ढा रहे हैं। बहुत ही सशक्‍त रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर और सशक्त रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  6. आंसू पर भी आपकी रचना ? कुछ तो हमारे लिए भी छोड़ दीजिए :)

    बहुत सुन्दर रचना .

    उत्तर देंहटाएं
  7. आँसुओं में सागर झकझोरने की क्षमता होती है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. ओह ! बडी ही मार्मिक रचना लिख दी आज तो………………बेहद खूबसूरत भाव्।

    उत्तर देंहटाएं
  9. आँसू के अस्तित्व,
    नहीं सागर से कम होते हैं।।
    आँसू तो सागर से विस्तृत अस्तित्व रखते हैं
    बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  10. आँसू के अस्तित्व,
    नहीं सागर से कम होते हैं

    अच्छी पंक्तिया की रचना की है ........

    (क्या अब भी जिन्न - भुत प्रेतों में विश्वास करते है ?)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_23.html

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुख और दुख दोनों में,
    सबके लोचन नम होते हैं।
    आँसू के अस्तित्व,
    नहीं सागर से कम होते हैं।।

    उत्तर देंहटाएं
  12. आँसू का अस्तित्व,
    नहीं सागर से कम होता है।।
    वाह ! बहुत सुन्दर ....बड़ी गहरी बात कही
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  13. आप की रचना 24 सितम्बर, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपनी टिप्पणियाँ और सुझाव देकर हमें अनुगृहीत करें.
    http://charchamanch.blogspot.com


    आभार

    अनामिका

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर कविता लिखा है आपने शास्त्री जी! हर एक शब्द में गहराई है! बेहतरीन प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ही सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति, भावमय प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत मंथन के बाद निकली है रचना |बहुत बहुत बधाई
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  17. एक आँसू मे सागर से भी अधिक गहरी संवेदनायें होती हैं बहुत सुन्दर रचना
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  18. रत्न वही पाता है जो,
    मंथक सक्षम होता है।
    आँसू का अस्तित्व,
    नहीं सागर से कम होता है।।
    सुंदर और सशक्त रचना

    उत्तर देंहटाएं
  19. sir app ney sahi likha hai sagar or asshu dono ek dosery sey alag nahi hai sabdo mei aashu or sagar dono chipey hai wha.

    उत्तर देंहटाएं

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