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मंगलवार, 21 सितंबर 2010

"ऐसा पागलपन अच्छा है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

रचना बाँच सुवासित मन हो!
पागलपन में भोलापन हो!
ऐसा पागलपन अच्छा है!!

घर जैसा ही बना भवन हो
!
महका-चहका हुआ वतन हो!
ऐसा अपनापन अच्छा है!!

प्यारा सा अपना आँगन हो!
निर्भय
खेल रहा बचपन हो!
ऐसा बालकपन अच्छा है!!

निर्मल सारा नील-गगन हो!
खुशियाँ बरसाता सा घन हो!
ऐसा ही सावन अच्छा है!!

खिला हुआ अपना उपवन हो!
प्यार बाँटता हुआ सुमन हो!
ऐसा ही तो मन अच्छा है!!

मस्ती में लहराता वन हो!

हरा-भरा सुन्दर कानन हो!

ऐसा ही कानन अच्छा है!!

ऐसे
बगिया-बाग-चमन हों!
जिसमें आम-नीम-जामुन हों!
ऐसा ही उपवन अच्छा है!!

छाया चारों ओर अमन हो!
शब्दों से सज्जित आनन हो!
ऐसा जन-गण-मन अच्छा है!!
ऐसा पागलपन अच्छा है!!

24 टिप्‍पणियां:

  1. घर जैसा ही बना भवन हो!
    महका-चहका हुआ वतन हो!
    ऐसा अपनापन अच्छा है!!
    बहुत सुन्दर और सठिक पंक्तियाँ! इस शानदार और लाजवाब रचना के लिए बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  2. छाया चारों ओर अमन हो!
    शब्दों से सज्जित आनन हो!
    ऐसा जन-गण-मन अच्छा है!!
    ऐसा पागलपन अच्छा है!!
    बहुत सुन्दर। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर रचना ...वाकई ऐसा पागलपन अच्छा है ..पर काश हो तो ..

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह वाह ……………एक बहुत ही सुन्दर रचना………॥बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्यारा सा अपना आँगन हो!
    निर्भय खेल रहा बचपन हो!
    ऐसा बालकपन अच्छा है ...


    बहुत ही सारगर्भीत रचना है .... बहुत कमाल का लिखते हैं आप शास्त्री जी ....

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी कविता आये,
    पढ़ना अच्छा लगता है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह. बहुत सुन्दर
    घर जैसा ही बना भवन हो!
    महका-चहका हुआ वतन हो!
    ऐसा अपनापन अच्छा है!!
    लाजवाब रचना

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर
    सुन्दर
    सुन्दर
    _________सुन्दरतम काव्य

    धन्यवाद शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ही कमाल का पागलपन है ये तो शास्त्री जी कोमल निर्मल रचना ...आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. इस रचना का वाचन भी अच्छा है ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. समझदारों को देखकर लगता है ...
    पागलपन ही अच्छा है ...!
    पागलपन में भोलापन हो!
    ऐसा पागलपन अच्छा है!!

    उत्तर देंहटाएं
  12. प्यारा सा अपना आँगन हो!
    निर्भय खेल रहा बचपन हो!
    ऐसा बालकपन अच्छा है!!

    ...बड़ी प्यारी लगी ये पंक्तियाँ..सशक्त रचना के लिए बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  13. sundar abhivyakti!

    Happy Anant Chaturdashi
    GANESH ki jyoti se noor miltahai
    sbke dilon ko surur milta hai,
    jobhi jaata hai GANESHA ke dwaar,
    kuch na kuch zarror milta hai
    “JAI SHREE GANESHA”

    उत्तर देंहटाएं
  14. खिला हुआ अपना उपवन हो!
    प्यार बाँटता हुआ सुमन हो!
    ऐसा ही तो मन अच्छा है!!
    --
    बहुत बढ़िया गीत की सबसे बढ़िया पंक्तियाँ!

    उत्तर देंहटाएं

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