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सोमवार, 13 सितंबर 2010

"अपनी भाषा हिन्दी!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

भारतमाता के सुहाग की, जो है पावन बिन्दी।
भोली-भाली सबसे प्यारी, है अपनी भाषा हिन्दी।।


भरी हुई है वैज्ञानिकता, व्यञ्जन और स्वरों में,
उच्चारण में बहुत सरलता, इसके सभी अक्षरों में,
ब्रज-गोकुल में बसी हुई हो, बनकर तुम कालिन्दी।
भोली-भाली सबसे प्यारी, है अपनी भाषा हिन्दी।।


सन्तों के कण्ठों से उपजी, मीठी-मीठी सुरसवती हो,
वीणा की झंकार सुनाती, सरस्वती सी सरसवती हो,
शीतल मन्द सुगन्ध पवन सी तुम बयार हो आनन्दी।
भोली-भाली सबसे प्यारी, है अपनी भाषा हिन्दी।।


अपनी हिन्दी भाषा का, कण-कण वन्दन करता है,
देवनागरी का जन-गण, मन से अभिनन्दन करता है,
इतना होने पर भी इंग्लिश भारत में क्यों जिन्दी?
भोली-भाली सबसे प्यारी, है अपनी भाषा हिन्दी।।

23 टिप्‍पणियां:

  1. ब्रज-गोकुल में बसी हुई हो, बनकर तुम कालिन्दी।
    भोली-भाली सबसे प्यारी, है अपनी भाषा हिन्दी।।

    बहुत सुन्दर कविता हिन्दी के स्तवन में ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. शीतल मन्द सुगन्ध पवन सी तुम बयार हो आनन्दी।
    भोली-भाली सबसे प्यारी, है अपनी भाषा हिन्दी।।
    सही कहा आपने! हमें तो अपने राष्ट्रभाषा से बेहद प्यार है और गर्व से कहते हैं की हम भारतीय हैं! अत्यंत सुन्दर रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुप्रभात शास्त्री जी,हिंदी के प्रति आपका निश्छल प्रेम झलकता है आपकी रचना से। बहुत सुंदर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. ऐसी ही है हमारी प्यारी हिंदी ...
    सुन्दर कविता !

    उत्तर देंहटाएं
  5. हिंदी भाषा को नमन ...और इतनी सटीक कविता के लिए आपका आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. हिन्दी अभी भी वह स्थान नहीं पा सकी है, जो उसका है...
    आपका प्रयत्न सराहनीय है...

    उत्तर देंहटाएं
  7. अपनी भाषा के प्रति ऐसा ही स्नेह और आदर का भाव होना चाहिये………………हमारा भी नमन्…………………बहुत सुन्दर लिखा आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  8. जितनी सरस कविता आपने प्रस्तुत की है हिन्दी उतनी ही सरस है। हिंदी तो दो पाटों को जोड़ता पुल है। इसी कारण से इसे उस भाषा की अनुगामिनी बनने की नियति प्रदान की गई जिसके खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में हिंदी तन कर खड़ी हुई थी।
    बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    शैशव, “मनोज” पर, आचार्य परशुराम राय की कविता पढिए!

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  9. बहुत खूब लिखा है |बधाई
    आशा

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  10. भोली-भाली सबसे प्यारी, है अपनी भाषा हिन्दी।। मुझे मान हे इस मेरी अपनी भाषा पर, हिन्दी मेरी भाषा है.

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  11. सन्तों के कण्ठों से उपजी, मीठी-मीठी सुरसवती हो,
    वीणा की झंकार सुनाती, सरस्वती सी सरसवती हो,

    Its great

    उत्तर देंहटाएं
  12. हिंदी के सम्मान में बड़ी प्यारी और विलक्षण कविता...बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  13. हिन्दी विकास का अच्छा प्रयत्न, अच्छी प्रस्तुति शास्त्री जी !

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  14. ब्रज-गोकुल में बसी हुई हो, बनकर तुम कालिन्दी।
    भोली-भाली सबसे प्यारी, है अपनी भाषा हिन्दी.
    बहुत सुन्दर.

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  15. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 14 - 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  16. हिंदी भाषा को नमन और सुंदर रचना के लिए आपको बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  17. अपनी हिन्दी भाषा का, कण-कण वन्दन करता है,
    देवनागरी का जन-गण, मन से अभिनन्दन करता है ..

    वाह ... सच है हिन्दी बिन भारत में आत्मा नही .....

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  18. आपकी रचना बहुत सुंदर है हिन्दी भाषा प्रेम झलकता है कविता बहुत सुन्दर है |बधाई

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  19. हम-सब की राज दुलारी है हिन्दी..
    अच्छी कविता सर

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  20. सुन्दर भाव |

    हिंदी दिवस की शुभकामना

    उत्तर देंहटाएं

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