"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 5 सितंबर 2010

“पाँच सितम्बर-शिक्षक का अभिनन्दन” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

अध्यापक का सबसे ज्यादा भारत में सम्मान है।
गोविन्द तक पहुँचाने वाला गुरू प्रथम सोपान है।।


गुरू ज्ञान का शक्ति पुंज है,
गुरू ही करुणा का निधान है,
विद्याओं का यह निकुंज है,
सबल राष्ट्र का महाप्राण है,
कंचन सा कर देने वाला गुरू पारस पाषाण है। 
गोविन्द तक पहुँचाने वाला गुरू प्रथम सोपान है।।


माँ ने दी सुन्दर सी काया,
शिक्षक ने जीना सिखलाया,
सामाजिकता कैसे आती,
गुरू ने बालक को बतलाया,
गुरू चरणों की रज में रचते-बसते चारों धाम हैं।
गोविन्द तक पहुँचाने वाला गुरू प्रथम सोपान है।।


आज हमारे हाथों में है,
रोली, अक्षत और चन्दन,
तन से मन से धन से हम,
करते शिक्षक का अभिनन्दन,
पाँच सितम्बर को भारत में, शिक्षक का सम्मान है।
गोविन्द तक पहुँचाने वाला गुरू प्रथम सोपान है।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. धन्य हो प्रभु.............

    बहुत पवित्र गीत प्रस्तुत किया

    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज हमारे हाथों में है,
    रोली, अक्षत और चन्दन,
    तन से मन से धन से हम,
    करते शिक्षक का अभिनन्दन,


    Saargarbhit aur Anukarniy abhivyakti

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर गीत...

    आज हम जो कुछ भी हैं गुरु के कारण ही हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  4. गुरु तो वन्दनीय है ५ सितम्बर ही क्यों हर दिन ही उनकी वंदना होनी चाहिए

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति के प्रति मेरे भावों का समन्वय
    कल (6/9/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
    और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. शास्त्रीजी ,

    गुरु सदैव महान है, आपकी कविता उसकी सम्पूर्णता और हमारे लिए उसके महत्व को प्रदर्शित कर रही है.
    इस दिवस पर मैं भी अपने सभी गुरुओं को नमन करती हूँ

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर गीत...

    शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. कंचन सा कर देने वाला गुरू पारस पाषाण है।
    गोविन्द तक पहुँचाने वाला गुरू प्रथम सोपान है ।।

    बहुत सुन्दर रचना.
    शिक्षक दिवस पर हार्दिक शुभकामनाये और बधाई .

    उत्तर देंहटाएं
  9. ये सुन्दर गीत तो आपके गुरु को गुरु-दक्षिणा हो गई...

    उत्तर देंहटाएं
  10. शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर गीत! शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं

  12. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाइयाँ और शुभकामनाएं | आशा है कि अपने सार्थक लेखन से आप ऐसे ही ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

    उत्तर देंहटाएं
  13. शिक्षक दिवस पर आपकी बेहतरीन प्रस्तुति ....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  14. माँ ने दी सुन्दर सी काया,
    शिक्षक ने जीना सिखलाया,
    सामाजिकता कैसे आती,
    गुरू ने बालक को बतलाया, ...

    वैसे तो किसी न किसी समय पर माँ और पिता भी गुरु का ही कार्य करते हैं हमारे जीवन में ...
    बहुत अच्छी रचना है ... गुरु को समर्पित ....

    उत्तर देंहटाएं
  15. bahut hi achcha likha hai shastri ji.abhinadan.....iske liye aapko bhi abhinandan.

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails