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शनिवार, 18 सितंबर 2010

"अतीत के झरोखे से" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

शिष्ट मधुर व्यवहार, बहुत अच्छा लगता है।
सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।

फूहड़पन के वस्त्र, बुरे सबको लगते हैं,
जंग लगे से शस्त्र, बुरे सबको लगते हैं,
स्वाभाविक श्रंगार, बहुत अच्छा लगता है।
सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।

वचनों से कंगाल, बुरे सबको लगते हैं,
जीवन के जंजाल, बुरे सबको लगते हैं,
सजा हुआ घर-बार, बहुत अच्छा लगता है।
सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।

चुगलखोर इन्सान, बुरे सबको लगते हैं,
सूदखोर शैतान, बुरे सबको लगते हैं,
सज्जन का सत्कार, बहुत अच्छा लगता है।
सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।

लुटे-पिटे दरबार, बुरे सबको लगते हैं,
दुःखों के अम्बार, बुरे सबको लगते हैं,
हरा-भरा परिवार, बहुत अच्छा लगता है।
सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।

मतलब वाले यार, बुरे सबको लगते हैं,
चुभने वाले खार, बुरे सबको लगते हैं,
निश्छल सच्चा प्यार, बहुत अच्छा लगता है।
सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. कविता से व्यक्त आदर्श संसार बहुत अच्छा लगता है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. अनजाने होकर भी अपनों सा प्यार,बहुत अच्छा लगता है।
    सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है ॥

    उत्तर देंहटाएं
  3. स्वाभाविक श्रंगार, बहुत अच्छा लगता है।.....
    -----------------------------
    कृपया यह ना सोचे की एक महिला हूँ इसलिए यहाँ भी मेरी नज़र
    श्रृंगार की पंक्ति पर ही रुकी :) पूरी रचना बहुत अच्छी लगी..... बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  4. मतलब वाले यार, बुरे सबको लगते हैं,
    चुभने वाले खार, बुरे सबको लगते हैं,
    निश्छल सच्चा प्यार, बहुत अच्छा लगता है।
    सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।
    ब्क़हुत जबर्दस्त, सुन्दर, संस्कार और व्यवहार लिये रचना बहुत अच्छी लगी। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. अच्छी चीजें हमेशा अच्छी लगती हैं।
    अच्छी कविता भी!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छे भाव और सच्ची बात.पर आज कल कौन इन्हें महत्व देता है.काश सबको ये बात समझ आ जाये.

    उत्तर देंहटाएं
  7. काव्य के आनंद की अनुभूति हुई ।

    उत्तर देंहटाएं

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