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मंगलवार, 14 सितंबर 2010

"भारत माँ का कर्ज चुकाना है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

इस गीत को सुनिए-
अर्चना चावजी के मधुर स्वर में!


तन से, मन से, धन से हमको, माँ का कर्ज चुकाना है। 
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।
 

राम-कृष्ण, गौतम, गांधी की हम ही तो सन्तान है,
शान्तिदूत और क्रान्तिकारियों की हम ही पहचान हैं।
ऋषि-मुनियों की गाथा को, दुनिया भर में गुंजाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

उनसे कैसा नाता-रिश्ता? जो यहाँ आग लगाते हैं,
हरे-भरे उपवन में, विष के पादप जो पनपाते हैं,
अपनी पावन भारत-भू से, भय-आतंक मिटाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

जिनके मन में रची बसी, गोरों की अंग्रेजी भाषा,
वो क्या समझेंगे भारत के जन,गण, मन की अभिलाषा ,
हिन्दी भाषा को हमको, जग की सिरमौर बनाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

प्राण-प्रवाहक, संवाहक हम, यही हमारा परिचय है,
हम ही साधक और साधना, हम ही तो जन्मेजय हैं,
भारत की प्राचीन सभ्यता, का अंकुर उपजाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

वीरों की इस वसुन्धरा में, आयी क्यों बेहोशी है?
आशाओं के बागीचे में, छायी क्यों खामोशी है?
मरघट जैसे सन्नाटे को, दिल से दूर भगाना है।
फिर से अपने भारत को, जग का आचार्य बनाना है।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना ....और अर्चना जी की आवाज़ का तो जवाब नहीं ..बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  2. आवाज़ और रचना दोनो ही शानदार हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. कित्ती प्यारी रचना और आवाज़ भी खूब...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर आवाज़ भी और रचना भी बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर गीत ....अर्चना जी को सुनना बहुत अच्छा लगा
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही भावपूर्ण और जोशभरा गीत ..बहुत अच्छा लगा सुनना .

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर गीत। संगीत सदैव की तरह मधुर।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर रचना. अर्चना जी को की आवाज़ में सुनना बहुत अच्छा लगा .

    उत्तर देंहटाएं

  9. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से, आप इसी तरह, हिंदी ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

    उत्तर देंहटाएं

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