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शनिवार, 21 अप्रैल 2012

"1300वाँ पुष्प" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


हमें जब भी हसीं लम्हे पुराने याद आते हैं
सभी मिलने-मिलाने के बहाने याद आते हैं

चमन में गूँजती हैं आज भी वो ही सदाएँ हैं
तुम्हारे गुनगुनाए गीत-गाने याद आते हैं

गवाही दे रहे हैं ये पुराने पेड़ बागों के
जहाँ बैठे कभी थे वो ठिकाने याद आते हैं

बहुत आँसू बहाये थे, बड़े सपने सजाए थे
जवानी के हमें अपने ज़माने याद आते हैं

हवा के एक झोंके ने उजाड़ा आशियाँ अपना
तुम्हारे वास्ते लिक्खे तराने याद आते हैं

कलेजे में समेटे हैं बुझी चिनगारियाँ अब तक
तुम्हारे रूप के मंजर सुहाने याद आते हैं

19 टिप्‍पणियां:

  1. १३००वीं पोस्ट की बधाई सर................

    बहुत सुंदर रचना...

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. लाज़वाब प्रस्तुति...१३००वीं पोस्ट की बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  3. खिलें बगीचे में सदा, भान्ति भान्ति के रंग ।
    पुष्प-पत्र-फल मंजरी, तितली भ्रमर पतंग ।


    तितली भ्रमर पतंग, बागवाँ शास्त्री न्यारे ।
    दुनिया होती दंग, आय के उनके द्वारे ।

    नित्य पौध नव रोप, हाथ से हरदिन सींचे ।
    कठिन परिश्रम होय, तभी तो खिलें बगीचे ।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी सहज अभिव्यक्ति हौले-हौले से
    मानस-मन तक स्वतः पहुँच जाती है।
    सच में अति सुन्दर रचना।
    मन मोहक।

    आनन्द विश्वास।

    उत्तर देंहटाएं
  5. कमाल की यादें हैं शास्त्री जी... १३०० पोस्टों की यात्रा! आप सचमुच प्रेरणा की मशाल हैं!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. १३००वीं पोस्ट की बधाई स्वीकारें ...सभी के लिए प्रेरणादायी है आपकी लेखन यात्रा

    उत्तर देंहटाएं
  7. 1300 post ............. kamal ka samarpan. meri shubhkamnain.
    .. ashok jamnani

    उत्तर देंहटाएं
  8. तेरह सौवें पुष्प की , खुशबू गाती गीत
    मुखरित अब भी बाग में, भूले बिसरे मीत
    भूले बिसरे मीत, सजा है मन का उपवन
    खिलते झरते पुष्प,इसी का नाम है जीवन
    बिछ जाते हैं नयन , कभी तनती हैं भौंहें
    खिलो सदा मुस्काओ, पुष्प ओ तेरह सौवें

    उत्तर देंहटाएं
  9. कुछ यादें बहुत ही सुखद होती है!...इन्हें अपने अलग किया ही नहीं जा सकता!...बहुत सुन्दर रचना!....आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  10. ...wow!...१३०० वी पोस्ट!...बहुत बहुत बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  11. १३००वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई सर................

    सुंदर रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  12. ढेरों बधाईयाँ, सारे मंजर याद रहेंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत आँसू बहाये थे, बड़े सपने सजाए थे
    जवानी के हमें अपने ज़माने याद आते हैं....
    हमे भी बहुत याद आयेंगे लेकिन बाद में...
    १३००वीं पोस्ट की बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  14. गवाही दे रहे हैं ये पुराने पेड़ बागों के
    जहाँ बैठे कभी थे वो ठिकाने याद आते हैं

    सार्थक प्रस्तुति!!

    1300 वी पोस्ट के लिए शुभकामनाएं!!

    उत्तर देंहटाएं

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