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सोमवार, 23 अप्रैल 2012

"दोहे-काहे का अभिमान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


चार दिनों की ज़िन्दगी, काहे का अभिमान।
धरा यहीं रह जाएगा, धन के साथ गुमान।।

जिनका सरल सुभाव है, उनका होता मान।
लम्पट, क्रोधी-कुटिल का, नहीं काम का ज्ञान।।

धन के सब स्वामी बने, नहीं कहावें दास।
जो बन जाते दास हैं, रहते वही उदास।।

कर्म बनाता भाग्य को, यह जीवन-आधार।
कर्तव्यों के साथ में, मिल जाता अधिकार।।

हित जिससे होवे जुड़ा, वो ही है साहित्य।
सभी विधाओं में रहे, शब्दों में लालित्य।।

20 टिप्‍पणियां:

  1. bhut sundar ,jeevan mulyon ko samjha jaye aese bhav haen bdhai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. हित जिससे होवे जुड़ा, वो ही है साहित्य।सभी विधाओं में रहे, शब्दों में लालित्य।

    सभी दोहे बहुत ही सुन्दर और विविध जानकारी से भरे हुए...आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सार्थक सन्देश देते बहुत सुन्दर दोहे...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रेम से गुजारनी हो, चार दिन की जीवनी..

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर संदेश देते सार्थक दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  6. कर्म बनाता भाग्य को, यह जीवन-आधार।
    कर्तव्यों के साथ में, मिल जाता अधिकार।

    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर दोहे,....

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...:गजल...

    उत्तर देंहटाएं
  7. कर्म बनाता भाग्य को, यह जीवन.आधार।
    कर्तव्यों के साथ में, मिल जाता अधिकार।।

    जीवन सूत्र बताते सुंदर दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  8. जीवन सूत्रों को रहे, गुरुवर मस्त पिरोय ।
    करे आचरण आज से, बुद्धिमान जो होय ।।

    उत्तर देंहटाएं
  9. ये जीवन सत्य है, भले ही कलयुग के प्रभाव में हम इसको स्वीकार नहीं कर पाते हें लेकिन ये एक शाश्वत सत्य है जिसे आपने दोहों में उतारा है. आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  10. नीते के दोहे, प्रभावशाली हैं और प्रेरक भी।

    उत्तर देंहटाएं
  11. नीते के दोहे, प्रभावशाली हैं और प्रेरक भी।

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह ! सुंदर !


    ये भी बता दो सिक्कोँ का घड़ा है
    घर के किस कोने में गड़ा है?

    उत्तर देंहटाएं
  13. पर आज कल तो सब कुछ पैसो से ही तोला जाता हैं .....कर्म भी पैसे से ही आता हैं ...धर्म,दोस्ती .ईमान ....सब हैं पैसे की ही देन

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बुधवारीय चर्चा-मंच
    पर है |

    charchamanch.blogspot.com

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  15. सहज,सरल और सुन्दर प्रस्तुति.
    बहुत ही सार्थक और प्रेरक.
    आपकी लेखनी को नमन,शास्त्री जी.

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  16. हित जिससे होवे जुड़ा, वो ही है साहित्य।
    सभी विधाओं में रहे, शब्दों में लालित्य।।
    सौदेश्य साहित्य शाष्त्री जी का .

    उत्तर देंहटाएं
  17. चार दिनों की ज़िन्दगी, काहे का अभिमान।
    धरा यहीं रह जाएगा, धन के साथ गुमान।।... उम्दा प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें ...

    उत्तर देंहटाएं

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