जीत को पचाने को, हार भी जरूरी है प्यार को मनाने को, रार भी जरूरी है घूमते हैं मनचले अलिन्द बाग में बहुत फूल को बचाने को, ख़ार भी जरूरी है जंग लगे शस्त्र से, युद्ध में विजय कहाँ शौर्य को दिखाने को, धार भी जरूरी है कुम्भ को कुम्हार. थाप मार-मार पीटता शिष्य को सिखाने को मार भी जरूरी है मन का मोर नाचता है, डंके की चोट से ढोल को बजाने को, वार भी जरूरी है चुगलखोर के बिना, बात फैलती नहीं शोर को मचाने को, स्यार भी जरूरी है हुस्न को दिखाने को, यार भी जरूरी है |
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प्यार को मनाने को, रार भी जरूरी है
जवाब देंहटाएंबहुत जरूरी है
बहुत सुन्दर गज़ल
रूपसी को ‘रूप’ की, सराहना भी चाहिए
जवाब देंहटाएंहुस्न को दिखाने को, यार भी जरूरी है,...
बहुत सुंदर गजल.//
हर शेर लाजबाब.
जवाब देंहटाएंमुखर अभिव्यक्ति यथार्थ बोध कराती रचना ....बहुत सुन्दर ... बधाईयाँ सर !
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया कंट्रास्ट उकेरा है..
जवाब देंहटाएंbahut khoob .aabhar
जवाब देंहटाएंLIKE THIS PAGE AND WISH INDIAN HOCKEY TEAM FOR LONDON OLYMPIC
जवाब देंहटाएंvaah bahut umda ghazal.
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर वाह!
जवाब देंहटाएंआपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 16-04-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-851 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ
समाज के सत्यों को बहुत सहजता से प्रस्तुत किया है।
जवाब देंहटाएंलाजवाब.............
जवाब देंहटाएंजी गुरु जी !!
जवाब देंहटाएंफटकार से काम न चले तो --
शिष्य को सिखाने को मार भी जरूरी है |
जीत को पचाने को, हार भी जरूरी है
जवाब देंहटाएंप्यार को मनाने को, रार भी जरूरी है
क्या कहने !
प्यार में रार जरूरी है !
बढि़या ल।
अच्छी गजल पर टिप्पणी भी जरूरी है। बहुत अच्छी।
जवाब देंहटाएंरूपसी को ‘रूप’ की, सराहना भी चाहिए
जवाब देंहटाएंहुस्न को दिखाने को, यार भी जरूरी है
---वाह!!!! क्या बात है...सुन्दर गज़ल...
अजित गुप्ता जी का आदेश पालन भी जरूरी है।
bahut sunder likhe hain aap......
जवाब देंहटाएंजंग लगे शस्त्र से, युद्ध में विजय कहाँ
जवाब देंहटाएंशौर्य को दिखाने को, धार भी जरूरी है
कुम्भ को कुम्हार. थाप मार-मार पीटता
शिष्य को सिखाने को मार भी जरूरी है
बहुत खूबसूरत गज़ल्।
प्यार के साथ तकरार भी ज़रूरी है बहुत ही सुंदर एवं सार्थक रचना....
जवाब देंहटाएंमीठा गीत ,
जवाब देंहटाएंआशिकी बचाने को माशुकी ज़रूरी है ,