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मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

"होगा जहाँ मुनाफा उस ओर जा मिलेंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
     सात जुलाई, 2009 को यह रचना लिखी थी! इस पर नामधारी ब्लॉगरों के तो मात्र 14 कमेंट आये थे मगर बेनामी लोगों के 137 कमेंट आये।
     एक बार पुनः इसी रचना ज्यों की त्यों को प्रकाशित कर रहा हूँ।
   आशा है कि आपको पसन्द आयेगी!
इन्साफ की डगर पर, नेता नही चलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।
दिल में घुसा हुआ है,
दल-दल दलों का जमघट।
संसद में फिल्म जैसा,
होता है खूब झंझट।
फिर रात-रात भर में, आपस में गुल खिलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफा उस ओर जा मिलेंगे।।
गुस्सा व प्यार इनका,
केवल दिखावटी है।
और देश-प्रेम इनका,
बिल्कुल बनावटी है।
बदमाश, माफिया सब इनके ही घर पलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।
खादी की केंचुली में,
रिश्वत भरा हुआ मन।
देंगे वहीं मदद ये,
होगा जहाँ कमीशन।
दिन-रात कोठियों में, घी के दिये जलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. अनुभूतियों को अभिव्यक्ति ने शहर कर दिया है ,
    नजरवालों को आँखें नजर कर दिया है-
    हकीकत से रूबरू कराती संवेदनशील रचना बहुत सुन्दर /

    उत्तर देंहटाएं
  2. सीधा साधा सच भला किसे न प्रभावित करेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  3. खादी की केंचुली में,
    रिश्वत भरा हुआ मन।
    देंगे वहीं मदद ये,
    होगा जहाँ कमीशन।

    संवेदनशील रचना ||

    आभार |

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपका लेखन 'कमेन्ट' का मोहताज नहीं है..
    हम खुशनसीब हैं की हमें नित नयी सुन्दर रचनाएँ पढने को मिलती हैं..
    बहुत खूब लिखा है आपने !

    उत्तर देंहटाएं
  5. ऋतू जी से सहमत!

    पहले तो पढ़ नहीं पाए थे,लेकिन अब पढ़ाने के लिए आभार!कलम यूँ चले तो कौन नहीं कटता इस से...



    कुंवर जी,

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपने नेताओं की खाट ख़ूब खड़ी की है.
    क्या कभी आपने लालची डाक्टरों पर भी कुछ लिखा है ?

    विदेश गए डाक्टर देश सेवा के लिए लौटते क्यों नहीं ?

    उत्तर देंहटाएं
  7. खादी की केंचुली में,
    रिश्वत भरा हुआ मन।
    देंगे वहीं मदद ये,
    होगा जहाँ कमीशन।
    दिन-रात कोठियों में, घी के दिये जलेंगे।
    होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।्………………वाह ………सबकी बखिया उधेड दी है………शानदार प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  8. ऐसा सच हैं जो कभी नहीं बदला हैं और ना बदलेगा ....

    उत्तर देंहटाएं
  9. बिल्‍कुल सच कहा है आपने ... उत्‍कृष्‍ट लेखन ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. गुस्सा व प्यार इनका,
    केवल दिखावटी है।
    और देश-प्रेम इनका,
    बिल्कुल बनावटी है।
    और...
    बन गए हैं लोकनायक
    अब...
    जाग रहे हैं लोग, बन्द करो अब भोग
    यदि नहीं किया ये योग तो...किनारे लगा दिये जाओगे

    उत्तर देंहटाएं
  11. सच कहा है ... कितना सार्थक गीत है आज के समय का ... नमस्कार शास्त्री जी ...

    उत्तर देंहटाएं
  12. आज के हालात पर कितनी सटीक टिप्पणी...बहुत सार्थक प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बुधवारीय चर्चा-मंच
    पर है |

    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  14. Waaah! Bilkul sahi kataksh kiya hai aapne Aajkal ke Netaon par.... Behtreen!!!

    उत्तर देंहटाएं
  15. दिन-रात कोठियों में, घी के दिये जलेंगे।
    होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।bahut achchi.....

    उत्तर देंहटाएं
  16. बदमाश, माफिया सब इनके ही घर पलेंगे।
    होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति समकालीन प्रसंगों पर खरी एक दम से .

    उत्तर देंहटाएं
  17. वाकई ....
    यह तो आते ही इसीलिए हैं !
    पापी पेट का सवाल है और कुछ आता भी नहीं , करें तो क्या करें ..!
    आभार बढ़िया रचना के लिए !

    उत्तर देंहटाएं
  18. खादी की केंचुली में, रिश्वत भरा हुआ मन। देंगे वहीं मदद ये, होगा जहाँ कमीशन।
    .....कितना बड़ा काम कर रहे है नेता लोग!..बहुत सटिक व्यंग्य!

    उत्तर देंहटाएं
  19. नेता को पता है कब से
    लिखी हुवी ये कविता है
    इस लिये वो आज भी
    अभी भी इसे जीता है।

    उत्तर देंहटाएं

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