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शनिवार, 7 अप्रैल 2012

‘‘गुब्बारे’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


बच्चों को जो लगते प्यारे।
वो कहलाते हैं गुब्बारे।।
गलियों-बाजारों, ठेलों में।
गुब्बारे बिकते मेलों में।।
काले-लाल, बैंगनी-पीले।
कुछ हैं हरे-बसन्ती, नीले।।
पापा थैली भरकर लाते।
जन्मदिवस पर इन्हें सजाते।।
फूँक मारकर इन्हें फुलाओ।
हाथों में ले इन्हें झुलाओ।।
सजे हुए हैं कुछ दुकान में।
कुछ उड़ते हैं आसमान में।।
मोहक छवि लगती है प्यारी।
गुब्बारों की महिमा न्यारी।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. आपके गुब्बारे मन को भा गए ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. जन्मदिन मनाने का जी करने लगा.............
    :-)

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर सुन्दर, रंग-बिरंगी गुब्बारे!...बच्चों के साथ साथ बड़ों का मन भी मोह रहे है!

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह रे |
    गुब्बारे |
    लगे दिल को
    बड़े प्यारे
    ये ढेर सारे
    रंग विरंगे
    गुब्बारे ||

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह!!!!!!बहुत सुंदर बाल रचना,अच्छी प्रस्तुति,...

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह शाष्त्री जी ,मनमोहक चित्र -बाल- गीत से हम भी लाभान्वित हुए आनंद बटोरा रंग बिरंगे गुब्बारों का नन्ने अन्नेनन्नों का .

    उत्तर देंहटाएं
  7. रंग बिरंगे प्यारे प्यारे, कितने सारे हैं गुब्बारे..

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. bahut bahut sundar baal rachana,,
    man moh liya hai is sundar si rang -birangi rachana ne,,
    bahut ...sundar.....

    उत्तर देंहटाएं
  10. प्यारी रचना बच्चों के लिए.

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह: गुब्बारों की रंग-बिरंगी दुनिया..सुन्दर..

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत अच्छी प्रस्तुति....

    उत्तर देंहटाएं
  13. !बहुत सुंदर गुब्बारों की दुनिया..

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर चित्रमयी रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  15. बड़े ही प्यारे हैं ये गुब्बारे... और बड़ी ही प्यारी है गुब्बारों वाली ये कविता... थैंक्यू अंकल!!!

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत ही अच्छी कविता है अंकल....:)

    उत्तर देंहटाएं

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