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रविवार, 22 अप्रैल 2012

"नदी के रेत पर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


रोज लिखता हूँ इबारत, मैं नदी के रेत पर
शब्द बन जाते ग़ज़ल मेरे नदी के रेत पर

जब हवा के तेज झोकों से मचलती हैं लहर
मेट देती सब निशां मेरे, नदी के रेत पर

चाहिए कोरे सफे, सन्देश लिखने के लिए
प्रेरणा मिलती मुझे, आकर नदी के रेत पर

हो स्रजन नूतन, हटें मन से पुरानी याद सब
निज नवल-उदगार को, रचता नदी के रेत पर

रूप भाता हैं मुझे फैली हुई बलुआर का
इसलिए आता नियम से मैं, नदी के रेत पर

25 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेरित करती बढ़िया रचना ।

    आभार गुरूजी ।।

    रेत नदी की है रखे, पुरखों के पद चिन्ह ।
    नव-चिन्हों से वे मगर, लगते इकदम भिन्न ।


    लगते इकदम भिन्न, यहाँ श्रद्धा ना दीखे ।
    खुदगर्जी संलिप्त, युवा मस्ती में चीखे ।

    उनको नहीं मलाल, समस्या इसी सदी की ।
    पर्यावरण बिगाड़, बिगाड़े रेत नदी की ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. रोज लिखता हूँ इबारत, मैं नदी के रेत पर
    चार पल में शब्द मिट जाते, नदी के रेत पर........
    कोमल भावो की अभिवयक्ति..

    उत्तर देंहटाएं
  3. कोमल भावो की शुषमा लालित्य लिये आकर्षक है आभार सर /

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही खूबसूरत भाव...उतनी ही खूबसूरत ग़ज़ल...

    उत्तर देंहटाएं
  5. “रूप” भाता हैं मुझे फैली हुई बलुआर का
    इसलिए आता नियम से मैं, नदी के रेत पर
    रोज़ आता हूँ नदी की रेत पे, छोड़ के उनके निशाँ .......

    भावनाओं को कुरेदती प्रगाढ़ अनुभूतियों को उद्वेलित करती रचना .

    उत्तर देंहटाएं
  6. चाहिए कोरे सफे, सन्देश लिखने के लिए
    प्रेरणा मिलती मुझे, आकर नदी के रेत पर

    वाह ...बहुत सुंदर गजल ... रेत तो वैसे भी मेरा प्रिय विषय है ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. चाहिए कोरे सफे, सन्देश लिखने के लिए
    प्रेरणा मिलती मुझे, आकर नदी के रेत परbahut achchi lagi......

    उत्तर देंहटाएं
  8. रेत के कण हमारी निस्सारता का बोध कराते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह क्या खूबसूरत भाव उकेरे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  10. आता नियम से मैं, नदी के रेत पर................बहुत ही खूबसूरत..

    उत्तर देंहटाएं
  11. चाहिए कोरे सफे, सन्देश लिखने के लिए
    प्रेरणा मिलती मुझे, आकर नदी के रेत पर
    एक बेहतरीन ग़ज़ल शास्त्री जी। बहुत आनंद आया पढ़कर।

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुंदर भावों से युक्त रचना.....

    सर यदि नदी "की" रेत पर कहें तो????

    रेत स्त्रीलिंग शब्द है तो "की" ज्यादा मधुर ना लगेगा???
    सर क्षमा करें..अन्यथा ना लें.

    सादर.

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर वाह!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 23-04-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-858 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  14. वाह बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ही सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई शास्त्री जी |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  16. शब्द बन जाते ग़ज़ल मेरे नदी के रेत पर
    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं

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