"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 29 अप्रैल 2012

"बेमौसम का गीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों! 
आज प्रस्तुत है बेमौसम का गीत
ताप धरा का कम करने को,
नभ में काले बादल छाए।
सूखे ताल-तलैया भरने,
आँचल में लेकर जल आये।।

मनभावन मौसम हो आया,
लू-गर्मी का हुआ सफाया,
ठण्डी-ठण्डी हवा चली है,
धान खेत में हैं लहराये।
सूखे ताल-तलैया भरने,
आँचल में लेकर जल आये।।

उमड़-घुमड़कर गरज रहे हैं,
झूम-झूमकर लरज रहे हैं,
लाल-लाल लीची फूली हैं,
आम रसीले मन को भाये।
सूखे ताल-तलैया भरने,
आँचल में लेकर जल आये।।

आँगन-चौबारों में पानी,
नदियों में आ गई रवानी,
मेढक टर्र-टर्र टर्राते,
हरे सिंघाड़े बिकने आये।
सूखे ताल-तलैया भरने,
आँचल में लेकर जल आये।।

सात रंग से सजा रूप है,
इन्द्रधनुष कितना अनूप है,
बच्चे गलियों के गड्ढों में
कागज वाली नाव चलायें।
सूखे ताल-तलैया भरने,
आँचल में लेकर जल आये।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर वाह!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 30-04-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-865 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. bas kuchh dino me ye mausam aane hi vala hai ...bahut sundar bhaav bahut sundar indrdhanushi rachna.

    उत्तर देंहटाएं
  3. ्कुछ छींटे तो पड़ने ही चाहिए....बहुत सुन्दर...

    उत्तर देंहटाएं
  4. गीतों का तो अपना ही मौसम होता है
    बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर है ये कविता... इतनी ज़बरदस्त गर्मी है बाहर... लेकिन इस कविता को पढ़ते-पढ़ते ऐसा लगने लगा जैसे सचमुच बाहर मौसम बहुत ही सुहाना हो गया है... ठंडी-ठंडी हवा चलने लगी है और बारिश हो रही है....:)

    उत्तर देंहटाएं
  6. बेमौसम का गीत भी बड़े समय से आया है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. अधिक व्यस्त था |

    सुन्दर प्रस्तुति |
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  8. गर्मी के मौसम में हो रही बेमौसम बारिश का गीत भी बेमौसम का ही होगा !

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर वर्णन बरसात का...

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत स्ंदर रचना ...शुभकामनाएँ ।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails