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बुधवार, 18 अप्रैल 2012

‘‘गंगा की वो धार कहाँ है’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

कलकल-छलछल, बहती अविरल,
हिमगिरि के शिखरों से चलकर,
आनेवाली धार कहाँ है?
गंगा की वो धार कहाँ है??
दर्पण जैसी निर्मल धारा,
जिसमें बहता नीर अपारा,
अर्पण-तर्पण करने वाली,
सरल-विरल चंचल-मतवाली,
पौधों में भरती हरियाली,
अमल-धवल आधार कहाँ है?
गंगा की वो धार कहाँ है??

भवसागर से पार लगाती,
कष्ट-क्लेश को दूर भगाती,
जो अपने पुरखों की थाती,
उसका दुख अब कौन हरेगा?
गंगा निर्मल कौन करेगा?
जल का स्रोत अपार कहाँ है?
गंगा की वो धार कहाँ है??

शंकर ने सिर पर बैठाया,
धरती ने आँचल फैलाया,
तब गंगा ने पाँव बढ़ाया,
जन-जन ने आनन्द मनाया,
ऋषि-मुनियों ने शीश नवाया,
शिव का वो संसार कहाँ है?
गंगा की वो धार कहाँ है??

भरा प्रदूषण इसमें भारी,
नष्ट हुई पावनता सारी,
आहत हैं सारे नर-नारी,
जिसका करते पूजन-वन्दन,
जिसका करते थे अभिनन्दन,
कुदरत का शृंगार कहाँ है?
गंगा की वो धार कहाँ है??

कलश कहाँ है अब अमृत का,
भटक रहा है पथिक सुपथ का,
पहिया जाम हुआ है रथ का,
कभी धाम था सदाचार का,
वहाँ गरल है अनाचार का,
हर-हर का हरद्वार कहाँ है?
गंगा की वो धार कहाँ है??

कलियुग का प्रभाव सबल है,
मानव के कर्मों का फल है,
तप और त्याग हुआ निष्फल है,
सुरभित-पुष्पित नहीं चमन है,
वीराना अपना उपवन है,
भागीरथ का प्यार कहाँ है?
गंगा की वो धार कहाँ है??

बिगड़ा नहीं अभी कुछ ज्यादा,
मन में हो यदि ठोस इरादा,
पथ बिल्कुल है सीधा-सादा,
व्रत लो गंगा साफ करेंगे,
नदियाँ दूषित नहीं करेंगे,
जहाँ चाह है, राह वहाँ है।
पावन जल की धार यहाँ है।।
कलकल-छलछल, बहती अविरल,
हिमगिरि के शिखरों से चलकर,
आनेवाली धार कहाँ है?
गंगा की वो धार कहाँ है??

23 टिप्‍पणियां:

  1. गंगा की ये हालत देखकर व्यथित हुआ मन ....
    बहुत सुंदर रचना ....
    जन मानस में इस विषय पर जागृति जगाना चाहिए और हम नागरिकों को प्रयास भी करने चाहिए ....इसकी सफाई के लिए ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. गंगा की धार प्रदूषित कर दी गयी है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. दर्पण जैसी निर्मल धारा,
    जिसमें बहता नीर अपारा,
    अर्पण-तर्पण करने वाली,
    सरल-विरल चंचल-मतवाली,
    पौधों में भरती हरियाली,
    अमल-धवल आधार कहाँ है?
    गंगा की वो धार कहाँ है??
    माँ गंगा की दशा और दुर्दशा का बेहद मर्मांतक चित्रण किया है………आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. ganga ko hum sab ko milkar bachana hai aapne sachitra bahut sandeshparak kavita rachi hai.badhaai

    उत्तर देंहटाएं
  5. पावन गंगा की ऐसी दुर्दशा से मन व्यथित हो उठता है!
    'गंगा की वो धार कहाँ है?'
    सार्थक रचना!...आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  6. हमारी नदियों की दुर्दशा देख मन व्यथित हो उठता है....
    बहुत सार्थक रचना शास्त्री जी...

    हर-हर का हरद्वार कहाँ है?
    गंगा की वो धार कहाँ है??

    लाजवाब प्रस्तुति.
    सादर.
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  7. खो गयी है गंगा..!
    कलमदान

    उत्तर देंहटाएं
  8. ज्वलंत समस्या - मधुर रचना द्वारा... आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  9. गंगा-यमुना की हालत वाकई सोचनीय है
    गंगा को तलाशती रचना

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाकई विचारणीय सुंदर प्रस्तुति,....

    उत्तर देंहटाएं
  11. व्रत लो गंगा साफ करेंगे,
    नदियाँ दूषित नहीं करेंगे,
    जहाँ चाह है, राह वहाँ है।

    उत्तर देंहटाएं
  12. जहाँ चाह है, राह वहाँ है।

    Ji Han.... Sunder Awhan hai....

    उत्तर देंहटाएं
  13. गंगा की दुर्दशा का सटीक चित्रण, बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  14. आशा भी है
    व्रत लो गंगा साफ करेंगे,
    नदियाँ दूषित नहीं करेंगे,
    जहाँ चाह है, राह वहाँ है।
    पावन जल की धार यहाँ है।।

    ले लिया व्रत निभाना होगा
    गंगा ही नहीं हर नदी को
    प्रदूषित होने से बचाना होगा
    मानवता को अगर पृथ्वी पर
    आगे भी ठहराना होगा ।

    उत्तर देंहटाएं
  15. सरल शब्दों में जीवन दायिनी, पापनाशिनी गंगा मय्या का दर्द आपने लेखनी के माध्यम से सचित्र वर्णित किया है, साधुवाद. मैंने भी गत ३० मार्च को एक लेख 'पानी रे पानी' में इस विषय को लपेटते हुए चिंताएं व्यक्त की है.

    उत्तर देंहटाएं
  16. आपकी पोस्ट कल 19/4/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा - 854:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत सुन्दर रचना के लिय आपका आभार ....न केवल रचना के लिए वल्कि एक ज्वलंत विषय पर
    लिखने के लिए भी एक बार फिर से आभार ...

    उत्तर देंहटाएं

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