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सोमवार, 30 अप्रैल 2012

"खो गया जाने कहाँ है आचरण" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


सभ्यता, शालीनता के गाँव में,
खो गया जाने कहाँ है आचरण?
कर्णधारों की कुटिलता देखकर,
देश का दूषित हुआ वातावरण।

सुर हुए गायब, मृदुल शुभगान में,
गन्ध है अपमान की, सम्मान में,
आब खोता जा रहा है आभरण।
खो गया जाने कहाँ है आचरण?

शब्द अपनी प्राञ्जलता खो रहा,
ह्रास अपनी वर्तनी का  हो रहा,
रो रहा समृद्धशाली व्याकरण।
खो गया जाने कहाँ है आचरण?

लग रहे घट हैं भरे, पर रिक्त हैं,
लूटने में राज को, सब लिप्त हैं,
पंक से मैला हुआ सब आवरण।
खो गया जाने कहाँ है आचरण?

12 टिप्‍पणियां:

  1. विलुप्त होती सभ्यता पर दर्द भरे मन के उदगार .....
    बहुत सुंदर रचना शास्त्री जी ...
    बधाई एवं शुभकामनायें ....

    जवाब देंहटाएं
  2. कहीं इस सब के लिए हम ही दोषी तो नहीं..
    बहुत सुन्दर कविता

    जवाब देंहटाएं
  3. hello tommy this is there web address address , they have 30% disc at the moment , tell them mick told you to ring

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर सार्थक प्रस्तुति,..बेहतरीन रचना,...

    MY RESENT POST .....आगे कोई मोड नही ....

    जवाब देंहटाएं
  5. आचरण देने की प्रथा ही जब समाप्‍त कर दी गयी है तब बेचारा आचरण कहां निवास करेगा? अच्‍छी कविता के लिए बधार्ह।

    जवाब देंहटाएं
  6. शोभा चर्चा-मंच की, बढ़ा रहे हैं आप |
    प्रस्तुति अपनी देखिये, करे संग आलाप ||

    मंगलवारीय चर्चामंच ||

    charchamanch.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  7. खो गया जाने कहाँ है आचरण?vakayee kahin nahin mil raha.....

    जवाब देंहटाएं
  8. कितना बड़ा सच व्यक्त किया है, आज के समाज का।

    जवाब देंहटाएं
  9. "वेल्थ इज़ लास्ट,नथिंग इज़ लास्ट।
    हेल्थ इज़ लास्ट ,सम थिंग इज़ लास्ट।
    केरेक्टर इज़ लास्ट,एवरी थिंग इज़ लास्ट। । "
    कहने वाले अपने साथ 'केरेक्टर' भी ले गए अब कहाँ से आए -"आचरण"?

    जवाब देंहटाएं
  10. शब्द अपनी प्राञ्जलता खो रहा,
    ह्रास अपनी वर्तनी का हो रहा,
    रो रहा समृद्धशाली व्याकरण।
    खो गया जाने कहाँ है आचरण?

    बिलकुल सही कहा है ...सुंदर रचना ...

    जवाब देंहटाएं

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