"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

"खो गया जाने कहाँ है आचरण" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


सभ्यता, शालीनता के गाँव में,
खो गया जाने कहाँ है आचरण?
कर्णधारों की कुटिलता देखकर,
देश का दूषित हुआ वातावरण।

सुर हुए गायब, मृदुल शुभगान में,
गन्ध है अपमान की, सम्मान में,
आब खोता जा रहा है आभरण।
खो गया जाने कहाँ है आचरण?

शब्द अपनी प्राञ्जलता खो रहा,
ह्रास अपनी वर्तनी का  हो रहा,
रो रहा समृद्धशाली व्याकरण।
खो गया जाने कहाँ है आचरण?

लग रहे घट हैं भरे, पर रिक्त हैं,
लूटने में राज को, सब लिप्त हैं,
पंक से मैला हुआ सब आवरण।
खो गया जाने कहाँ है आचरण?

12 टिप्‍पणियां:

  1. विलुप्त होती सभ्यता पर दर्द भरे मन के उदगार .....
    बहुत सुंदर रचना शास्त्री जी ...
    बधाई एवं शुभकामनायें ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. कहीं इस सब के लिए हम ही दोषी तो नहीं..
    बहुत सुन्दर कविता

    उत्तर देंहटाएं
  3. hello tommy this is there web address address , they have 30% disc at the moment , tell them mick told you to ring

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर सार्थक प्रस्तुति,..बेहतरीन रचना,...

    MY RESENT POST .....आगे कोई मोड नही ....

    उत्तर देंहटाएं
  5. आचरण देने की प्रथा ही जब समाप्‍त कर दी गयी है तब बेचारा आचरण कहां निवास करेगा? अच्‍छी कविता के लिए बधार्ह।

    उत्तर देंहटाएं
  6. शोभा चर्चा-मंच की, बढ़ा रहे हैं आप |
    प्रस्तुति अपनी देखिये, करे संग आलाप ||

    मंगलवारीय चर्चामंच ||

    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  7. खो गया जाने कहाँ है आचरण?vakayee kahin nahin mil raha.....

    उत्तर देंहटाएं
  8. कितना बड़ा सच व्यक्त किया है, आज के समाज का।

    उत्तर देंहटाएं
  9. "वेल्थ इज़ लास्ट,नथिंग इज़ लास्ट।
    हेल्थ इज़ लास्ट ,सम थिंग इज़ लास्ट।
    केरेक्टर इज़ लास्ट,एवरी थिंग इज़ लास्ट। । "
    कहने वाले अपने साथ 'केरेक्टर' भी ले गए अब कहाँ से आए -"आचरण"?

    उत्तर देंहटाएं
  10. शब्द अपनी प्राञ्जलता खो रहा,
    ह्रास अपनी वर्तनी का हो रहा,
    रो रहा समृद्धशाली व्याकरण।
    खो गया जाने कहाँ है आचरण?

    बिलकुल सही कहा है ...सुंदर रचना ...

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails