"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 25 अप्रैल 2012

"मजहब की दूकानों में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


भटक रहा है आज आदमी, सूखे रेगिस्तानों में।
चैन-ओ-अमन, सुकून खोजता, मजहब की दूकानों में।

चौकीदारों ने मालिक को, बन्धक आज बनाया है,
मिथ्या आडम्बर से, भोली जनता को भरमाया है,
धन के लिए समागम होते, सभागार-मैदानों में।

पहले लूटा था गोरों ने, अब काले भी लूट रहे,
धर्मभीरु भक्तों को, भगवाधारी जमकर लूट रहे,
क्षमा-सरलता नहीं रही, इन इन्सानी भगवानों में।

झोली भरते हैं विदेश की, हम सस्ते के चक्कर में,
टिकती नहीं विदेशी चीजें, गुणवत्ता की टक्कर में,
नैतिकता नीलाम हो रही, परदेशी सामानों में।

जितनी ऊँची दूकानें, उनमें फीके पकवान सजे,
कंकड़-पत्थर भरे कुम्भ से, कैसे सुन्दर साज बजे,
खोज रहे हैं लोग जायका, स्वादहीन पकवानों में।

गंगा सूखी, यमुना सूखी, सरस सुमन भी सूख चले,
ज्ञानभास्कर लुप्त हो गया, तम का वातावरण पले,
ईश्वर-अल्लाह कैद हो गया, आलीशान मकानों में।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. सच लिखा है आपने ..बहुत सुन्दरता से..!

    उत्तर देंहटाएं
  2. khalis sach hae shastriji, aapki post sda hi ytharth ka darshan krati hae .aabhar. meri nai post par aapke samiksh ka svagat hae.

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपने सही कहा है कि आज आदमी धर्म के ठेकेदारों के चक्कर में उलझ कर जी रहा है।
    जो नदी तालाब के किनारे पड़े हैं उनका हाल और ज़्यादा ख़राब है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. गंगा सूखी, यमुना सूखी, सरस सुमन भी सूख चले,
    ज्ञानभास्कर लुप्त हो गया, तम का वातावरण पले,
    ईश्वर-अल्लाह कैद हो गया, आलीशान मकानों में।।

    ....आज का कटु सत्य...बहुत सुंदर और सटीक प्रस्तुति...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. झोली भरते हैं विदेश की, हम सस्ते के चक्कर में,टिकती नहीं विदेशी चीजें, गुणवत्ता की टक्कर में,नैतिकता नीलाम हो रही, परदेशी सामानों में।

    ...सच्चाई तो यही है...सुन्दर प्रस्तुति!...आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया गुरूजी ।।

    भक्त स्वार्थी हो गए, भूल गए भगवान् ।

    बुद्धि गिरवी रख करें, ढोंगी के गुणगान ।।



    गोरो के रंगरूट ये, काला तन-मन चाल ।

    लूट-पाट कर कुकर्मी, चले ठोंकते ताल ।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह बहुत खूब .......


    धर्म के नाम की दुहाई ...ज़ाहिल लोग ही देते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर प्रस्तुति,..प्रभावी रचना,..

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: गजल.....

    उत्तर देंहटाएं
  9. खोज रहे हैं लोग जायका, स्वादहीन पकवानों में।
    यही तो विडंबना है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. ईश्वर-अल्लाह कैद हो गया, आलीशान मकानों में...
    बहुत ही सुन्दर भाव...प्रभावशाली रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  11. आपकी पोस्ट कल 19/4/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 861:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी पोस्ट कल 26/4/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 861:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही सटीक चित्रण किया है आपने ..आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  14. झोली भरते हैं विदेश की, हम सस्ते के चक्कर में,
    टिकती नहीं विदेशी चीजें, गुणवत्ता की टक्कर में,

    नैतिकता नीलाम हो रही, परदेशी सामानों में।

    भाव लय ताल अर्थ ,व्यंजना सभी कुछ समोए बढ़िया व्यंग्य गीत .
    बस थोड़ा सा इंतज़ार ,फिर हाज़िर है -

    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग चार .

    शुक्रिया आपकी द्रुत और उत्साहवर्धक टिप्पणियों का .

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत खूबसूरत रचना बहुत सुन्दर शब्द संयोजन |

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails