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गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

"देहरादून यात्रा-दस दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

दो दिन दिल्ली में रुका,  निबटाए कुछ काम।
फिर घर आया लौटके, करने को आराम।१।
कोरे कागज पर लिखे, अपने कुछ मजमून।
फिर पत्नी को साथ ले, पहुँचा देहरादून।२।
बड़े पुत्र के सदन में, किया अल्प विश्राम।
फिर दर्शन करने गया, नारायण के धाम।३।
 
मिलता है सौभाग्य से, पंडित जी का साथ।
सियासती वटवृक्ष से, हुई हमारी बात।४।
ये विकास के पुरुष हैं, इनका है सन्देश।
गंगा बहे विकास की, प्रगतिशील हो देश।५।
उर में बहता है सदा, ममता का लालित्य।
ऐसे अपने गुरू को, भेंट किया साहित्य।६।
नारायण दरबार में, जो रहते हैं मग्न।
वो संजय जोशी अभी, सेवा में संलग्न।७।
फोन किया मेरे लिए, पाकर के आदेश।
मुख्यमन्त्री से मिलो, दिया मुझे सन्देश।८।
नारायण का पत्र ले, मैं पहुँचा दरबार।
विजय बहुगुणा का मिला, मुझको स्नेह अपार।९।
नाविक को मझधार में, चप्पू की है ओट।
घर का बुद्धू आ गया, घर को अपने लौट।१०।

20 टिप्‍पणियां:

  1. नाविक को मझधार में, चप्पू की है ओट।
    घर का बुद्धू आ गया, घर को अपने लौट।
    देर आयद दुरुस्त आयद .गुस्ताखी माफ़ .बढ़िया देहरादूनी दोहे लीची से मीठे .भगवान् आपकी यात्रा फल प्रद सिद्ध होवे .

    उत्तर देंहटाएं
  2. नाविक को मझधार में, चप्पू की है ओट।
    घर का बुद्धू आ गया, घर को अपने लौट।
    देर आयद दुरुस्त आयद .गुस्ताखी माफ़ .बढ़िया देहरादूनी दोहे लीची से मीठे .भगवान् आपकी यात्रा फल प्रद सिद्ध होवे .

    उत्तर देंहटाएं
  3. jeevan ke har pal aur har ghatna ko kaise jeekar shabdon men dhal kar sabse baant len ye apake siva aur koi nahin kr sakata hai.
    bahut achchha lagata hai jab apake dohe padhati hoon.

    उत्तर देंहटाएं
  4. इतना काम करने के बाद घर आने का आनन्द ही अलग है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बढ़िया प्रस्तुति ||

    बहुत बहुत आभार ||

    उत्तर देंहटाएं
  6. पास पास से लौट गए किया हमे नाराज
    देहरादून आप आये थे पता चला ये आज |

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह क्या बात है! बधाई शास्त्री जी..

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह क्या बात है! बधाई शास्त्री जी..

    उत्तर देंहटाएं
  9. बड़े बड़े लोगों से मुलाकात कर आये आप.

    उत्तर देंहटाएं





  10. आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी
    सादर प्रणाम !!

    ¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤
    रूपचंद्रजी शास्त्री, आदर सहित प्रणाम !
    राजनीति में भी करें , ऊंचा अपना नाम !!

    नेताओं को बेवफ़ा होने का है श्राप !
    मत बिसरा देना हमें, लीडर बन कर आप !!

    मन से है शुभकामना , करें आप स्वीकार !
    मिले सफलता तब हमें , दें मत आप बिसार !!

    शुरू प्रतीक्षा हो गई , शीघ्र दीजिए भोज !
    कवि-सम्मेलन का मुझे न्यौता भेजें रोज़ !!
    -राजेन्द्र स्वर्णकार
    ¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤



    शुभकामनाओं-मंगलकामनाओं सहित…
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  11. आप नित्य उन्नति करें पूरें हो सब काम।
    मुझ जैसे इस अनुज का पहुँचे सदा प्रणाम।

    उत्तर देंहटाएं
  12. ईश्वर आपकी मनो कामना पुर्ण करे,...

    अनुपम भाव लिए सुंदर रचना...बेहतरीन पोस्ट
    .
    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

    उत्तर देंहटाएं
  13. नाविक को मझधार में, चप्पू की है ओट।
    घर का बुद्धू आ गया, घर को अपने लौट।

    घर लौटना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है.
    बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ शास्त्री जी.

    उत्तर देंहटाएं
  14. सबसे अच्छा
    अपना घर
    होता खुश
    पाकर अपना
    बुद्धू !

    उत्तर देंहटाएं
  15. आज शुक्रवार
    चर्चा मंच पर
    आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति ||

    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

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