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गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

"फतह मिलती सिकन्दर को" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


रतन की खोज में हमने, खँगाला था समन्दर को
इरादों की बुलन्दी से, बदल डाला मुकद्दर को

लगी दिल में लगन हो तो, बहुत आसान है मंजिल
हमेशा जंग में लड़कर, फतह मिलती सिकन्दर को

अगर मर्दानगी के साथ में, जिन्दादिली भी हो
जहां में प्यार का ज़ज़्बा, बनाता मोम पत्थर को

नहीं ताकत थी गैरों में, वतन का सिर झुकाने की
हमारे देश का रहबर, लगाता दाग़ खद्दर को

हमारे रूप पर आशिक हुए दुनिया के सब गीदड़
सभी मकड़ी के जालों में फँसाते शेर बब्बर को

23 टिप्‍पणियां:

  1. अगर मर्दानगी के साथ में, जिन्दादिली भी हो
    जहां में प्यार ज़ज़्बा, बनाता मोम पत्थर को
    वाह इस शेर के तो क्या कहने चित्र भी और ग़ज़ल भी काबिले तारीफ है व्यंग्य का पुट भी सराहनीय है

    उत्तर देंहटाएं
  2. अगर मर्दानगी के साथ में, जिन्दादिली भी हो
    जहां में प्यार ज़ज़्बा, बनाता मोम पत्थर को......
    बहुत सुंदर लिखा है आपने जहाँ प्रेम होता है बहा पत्थर भी मोम बन जाता है ,,,बहुत सुंदर कविता .....

    उत्तर देंहटाएं
  3. .
    .
    .

    रोचक सुंदर कविता ।

    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  4. गहरी बातें बेहद सरलता से कह जाते हैं ……बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत बढ़िया सर...................

    कविताओं का खजाना है आपके पास...........

    सादर.
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह !!!! बहुत खूब सुंदर रचना,..

    उत्तर देंहटाएं
  7. लगी दिल में लगन हो तो, बहुत आसान है मंजिलहमेशा जंग में लड़कर, फतह मिलती सिकन्दर को!

    ...कितनी सुन्दर प्रेरक पंक्तियाँ!....आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  8. इरादे बुलंद हो तो सीमा असीम हो जाती है .दूध गंगाएं पास खिसक आतीं हैं .जोश की रचना ,बढ़िया प्रस्तुति ..http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/कृपया यहाँ भी पधारें -
    जानकारी :कोलरा (हैजा ).

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति |
    शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ||

    सादर

    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  10. सरल शब्द और सोच का भंडार हैं आप ....बहुत सरल शब्दों में अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  11. शास्त्री जी ......आप अपना पता मेल कर दे ........मैं आपको पुस्तक भेज देती हूँ .....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  12. रतन की खोज में हमने, खँगाला था समन्दर को
    इरादों की बुलन्दी से, बदल डाला मुकद्दर को
    बहुत सुंदर रचना ...
    शुभकामनायें...

    उत्तर देंहटाएं
  13. जहां में प्यार का ज़ज़्बा, बनाता मोम पत्थर को

    आ. शास्त्री जी, आप सिर्फ़ कहने के लिए कोई ग़ज़ल या कविता नहीं कहते। इनकी पंक्तियां बड़ी सरलता से मन को झकझोड़ देती हैं। मन के लिए खुराक दे देती हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  14. नहीं ताकत थी गैरों में, वतन का सिर झुकाने की
    हमारे देश का रहबर, लगाता दाग़ खद्दर को
    यहीं जैचंद हैं सारे ,विभीषण हर गली घर में .......

    है ड्रेगन एक अपना भी ,जरा तुम गौर से देखो .बढ़िया प्रस्तुति शाष्त्री जी की . बस थोड़ा सा इंतज़ार ,फिर हाज़िर है -

    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग चार .

    शुक्रिया आपकी द्रुत और उत्साहवर्धक टिप्पणियों का .

    उत्तर देंहटाएं
  15. नहीं ताकत थी गैरों में, वतन का सिर झुकाने की
    हमारे देश का रहबर, लगाता दाग़ खद्दर को

    बहुत ही सटीक और मार्मिक बात कह दी...

    उत्तर देंहटाएं
  16. hello heres the site just say paul put you onto them
    p beartil

    उत्तर देंहटाएं
  17. लगी दिल में लगन हो तो, बहुत आसान है मंजिल
    हमेशा जंग में लड़कर, फतह मिलती सिकन्दर को
    ....सच सच्ची लगन हो तो कुछ भी असंभव नहीं..
    बहुत सुन्दर सार्थक रचना ..

    उत्तर देंहटाएं

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