"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

‘‘मेरा बस्ता कितना भारी’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 
मेरा बस्ता कितना भारी।
बोझ उठाना है लाचारी।।

मेरा तो नन्हा सा मन है।
छोटी बुद्धि दुर्बल तन है।।

पढ़नी पड़ती सारी पुस्तक।
थक जाता है मेरा मस्तक।।

रोज-रोज विद्यालय जाना।
बड़ा कठिन है भार उठाना।।
कम्प्यूटर का युग अब आया।
इसमें सारा ज्ञान समाया।।

मोटी पोथी सभी हटा दो।
बस्ते का अब भार घटा दो।।

थोड़ी कॉपी, पेन चाहिए।
हमको मन में चैन चाहिए।।

कम्प्यूटर जी पाठ पढ़ायें।
हम बच्चों का ज्ञान बढ़ाये।

सस्ते में चल जाये काम।
छोटा बस्ता हो आराम।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. bal kavita aur tasveer dekhkar bachhon par lade bhaari bharkam baste jo roj subhah uthane padte hain van tad samne nazar aane lage..

    उत्तर देंहटाएं
  2. छोटे बच्चों पर इतना बोझ लादना अनुचित है
    बहुत बढ़िया रचना,सुंदर भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन पोस्ट,....

    उत्तर देंहटाएं
  3. हालत खस्ता हो रही, हुवे मिलावट खोर ।

    शुद्ध दूध मिलता नहीं, कंधे हैं कमजोर ।

    कंधे हैं कमजोर, नहीं बाबा जस पोता ।

    जंक फूड का टिफिन, कृष्ण घी मक्खन खोता ।

    कह रविकर करजोर, बदलिए भारी बस्ता ।

    कंधे झुकते जांय, हुई है हालत खस्ता ।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाकई .......आपकी कविता पढ़ने के बड लग रहा हैं की कम्पूटर का ज़माना आ ही गया हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. कंप्यूटर के बाद भी अभी तक बस्ता भारी है ... अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  6. Very nice poem. May the so called Educationalists understand the pain of children. School children feel more pressure in minds than the pressure loaded on their backs in school bags. Actually to be blamed is our educational system, which sometimes seems to be run by some shepherds. it's now time to change the educational system.

    उत्तर देंहटाएं
  7. छोटे बच्चों पर इतना बोझ लादना अनुचित है ...बस्ते की जगह लैपटॉप...अच्छा विचार है..

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत संवेदनशील रचना,बहुत ही सुंदर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  9. आप को सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया,"राजपुरोहित समाज" आज का आगरा और एक्टिवे लाइफ
    ,एक ब्लॉग सबका ब्लॉग परिवार की तरफ से सभी को भगवन महावीर जयंती, भगवन हनुमान जयंती और गुड फ्राइडे के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ॥
    आपका

    सवाई सिंह{आगरा }

    उत्तर देंहटाएं
  10. एकदम सही कहा आपने काश ये बात सरकार और प्राइवेट स्कूल समझ जायें तो कितना अच्छा हो....

    उत्तर देंहटाएं
  11. मोटी पोथी सभी हटा दो।
    बस्ते का अब भार घटा दो।।

    बहुत सुन्दर ... सन्देश और आह्वान

    उत्तर देंहटाएं
  12. bojh ho gya tan par ab bhari,kaisi hai yah bachapan ki lachari,
    yaddast ko taji karti prastuti

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails