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शनिवार, 28 अप्रैल 2012

‘‘मेरी पसन्द के सात दोहे’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मानव बोता खेत में, कंकरीट और ईंट।
बिन चावल और दाल के, रहा खोपड़ी पीट।१।

बेटी के दुख-दर्द को, समझ न पाते लोग।
नारी को वस्तु समझ, लोग रहे हैं भोग।२।

राजनीति है वोट की, खोट, नोट भरमार।
पढ़े-लिखों को हाँकते, अनपढ़, ढोल, गवाँर।३।

छिपा खजाना ज्ञान का, पुस्तक हैं अनमोल।
इनको कूड़ा समझ कर, रद्दी में मत तोल।४।

झगड़ा है सुख के लिए, जगवालों के बीच।
वैतरणी के मध्य में, डूब रहे हैं नीच।५।

बन्द लिफाफों में भरा, शब्दों का सब सार।
खोलो ज्ञान कपाट को, भर लो नवल विचार।६।

प्राणिमात्र कल्याण का, वेदों में सन्देश।
जीवन में धारण करो, ये अनुपम उपदेश।७।

19 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया दोहे गुरु जी ।।

    आभार ।।

    रोटी कपडा से हुआ, पहले आज मकान ।
    खाय विटामिन गोलियां, मानव फिर नंगान ।।

    नारी के प्रति सोच को, न बदले नादान ।
    देखेगी दुनिया सकल, खुद अपना अवसान ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बिखेरी आपने सच्ची नीति औ ज्ञान

    करते हैं तारीफ़ हम,धन्य धन्य अभिज्ञान.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर प्रस्तुति,..बेहतरीन दोहे,..

    MY RESENT POST .....आगे कोई मोड नही ....

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर संदेश देते सार्थक दोहे

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर संदेश देते सार्थक दोहे.......

    उत्तर देंहटाएं
  6. राजनीति है वोट की, खोट, नोट भरमार।
    पढ़े-लिखों को हाँकते, अनपढ़, ढोल, गवाँर।३।
    राजनीति अर्थ और समाज नीति का सार तत्व लिए है ये संक्षिप्त दोहावली .बधाई .कृपया यहाँ भी पधारें
    शनिवार, 28 अप्रैल 2012
    मंगल भवन अमंगल हारी...
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  7. सभी दोहे बहुत सार्थक और सुंदर..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  8. Sahi kaha aapne.

    सज़ा दिलाने के लिए यहां सदियां दरकार हैं।
    देखिए एक लघुकथा
    विवाद -एक लघुकथा डा. अनवर जमाल की क़लम से Dispute (Short story)

    http://mankiduniya.blogspot.com/2012/04/dispute-short-story.html

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर संदेश देते सार्थक दोहे,.....

    उत्तर देंहटाएं
  10. छिपा खजाना ज्ञान का, पुस्तक हैं अनमोल।
    इनको कूड़ा समझ कर, रद्दी में मत तोल।४।
    बहुत सुंदर और प्रेरक दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  11. राजनीति है वोट की, खोट, नोट भरमार।
    पढ़े-लिखों को हाँकते, अनपढ़, ढोल, गवाँर।

    बिल्कुल सही बात है,
    यही हो रहा है आजकल।

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी पसंद के दोहे.. सभी एक से बढ़कर एक

    उत्तर देंहटाएं
  13. आदरणीय मयंकजी,
    कितने सरल और भाव संप्रेषण में अनोखे हैं आपके ये दोहे. मैं तो बस आपकी रचनाओं का मुरीद बन चुका हूं।

    उत्तर देंहटाएं

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