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गुरुवार, 2 जून 2011

‘‘बूढ़ों को सलाह’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरी एक पुरानी रचना!
बचपन बीता गयी जवानी, कठिन बुढ़ापा आया।
कितना है नादान मनुज, यह चक्र समझ नही पाया।

अंग शिथिल हैं, दुर्बल तन है, रसना बनी सबल है।
आशाएँ और अभिलाषाएँ, बढ़ती जाती प्रति-पल हैं।।

धीरज और विश्वास संजो कर, रखना अपने मन में।
रंग-बिरंगे सुमन खिलेंगे, घर, आंगन, उपवन में।।

यही बुढ़ापा अनुभव के, मोती लेकर आया है।
नाती-पोतों की किलकारी, जीवन में लाया है।।

मतलब की दुनिया मे, अपने कदम संभल कर धरना।
वाणी पर अंकुश रखना, टोका-टाकी मत करना।।

देख-भालकर, सोच-समझकर, ही सारे निर्णय लेना।
भावी पीढ़ी को उनका, सुखमय जीवन जीने देना।।

33 टिप्‍पणियां:

  1. अंग शिथिल हैं, दुर्बल तन है, रसना बनी सबल है।
    आशाएँ और अभिलाषाएँ, बढ़ती जाती प्रति-पल हैं।।

    यही है ज़िन्दगी की सच्चाई……………बहुत सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी सलाह और अच्छी कविता.

    उत्तर देंहटाएं
  3. यही बुढ़ापा अनुभव के, मोती लेकर आया है।
    नाती-पोतों की किलकारी, जीवन में लाया है।

    आपके खजाने मे हर किसी के लिये कुछ न कुछ है ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. धीरज और विश्वास संजो कर, रखना अपने मन में।
    रंग-बिरंगे सुमन खिलेंगे, घर, आंगन, उपवन में।।

    सही और उपयोगी सीख है...
    बहुत अच्छी रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  5. मतलब की दुनिया मे, अपने कदम संभल कर धरना।
    वाणी पर अंकुश रखना, टोका-टाकी मत करना।।

    ये सलाह सभी के लिये उपयोगी है.

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी ये कविता मात्र ही नहीं ....धरोहर है ये
    इसे सबको ही संभाल के रखना होगा ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. मतलब की दुनिया मे, अपने कदम संभल कर धरना।
    वाणी पर अंकुश रखना, टोका-टाकी मत करना।।bahut achchi seekh deti hui saarthak rachanaa.badhaai sweekaren.

    उत्तर देंहटाएं
  8. अच्छा किया,मैं भी ध्यान रखूँगा !

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेशक एक दिन बुढापा आना है, हर उम्र का अपना मजा होता है

    उत्तर देंहटाएं
  10. मतलब की दुनिया मे, अपने कदम संभल कर धरना।
    वाणी पर अंकुश रखना, टोका-टाकी मत करना।।

    देख-भालकर, सोच-समझकर, ही सारे निर्णय लेना।
    भावी पीढ़ी को उनका, सुखमय जीवन जीने देना।।

    उत्तर देंहटाएं
  11. बचपन बीता गयी जवानी, कठिन बुढ़ापा आया।
    कितना है नादान मनुज, यह चक्र समझ नही पाया।

    जीवन चक्र को कौन समझा है.

    उत्तर देंहटाएं
  12. शास्त्री जी,

    बहुत सही सलाह दी है अपने, लेकिन इससे सबक लेने वाले कितने लोग होंगे और अगर होंगे तो वे शेष जीवन में सुखी होंगे. ये कविता नहीं बल्कि सुख की कुंजी है.

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  13. सबका सम्मानित स्थान है समाज में, सबकी आवश्यकता है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपकी ये तस्वीर बहुत सुन्दर है! ज़िन्दगी की सच्चाई को आपने बड़े ही खूबसूरती से प्रस्तुत किया है! शानदार रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  15. यही बुढ़ापा अनुभव के, मोती लेकर आया है।
    नाती-पोतों की किलकारी, जीवन में लाया है।

    Bahut sunder

    उत्तर देंहटाएं
  16. सही और उपयोगी सीख है| बहुत सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  17. एक कटु सच्चाई को बिना किसी तल्खी के आपने सहज होकर गेय कविता में प्रस्तुत कर दिया है।

    उत्तर देंहटाएं
  18. बड़े बूढे तो हमारे सिर पर वरद-हस्त हैं, वह वृक्ष हैं जो हमें छाया देते हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत अच्छा लगा, खासकर: "बुढ़ापा अनुभव के, मोती लेकर आया है।"

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  20. bahut jaajabab kavita likhi hai aapne.har kisi ko isse seekh leni chahiye.abhaar.

    उत्तर देंहटाएं
  21. धीरज और विश्वास संजो कर, रखना अपने मन में।
    रंग-बिरंगे सुमन खिलेंगे, घर, आंगन, उपवन में।।

    Awesome !

    Beautiful creation Shastri ji .

    .

    उत्तर देंहटाएं
  22. यही बुढ़ापा अनुभव के, मोती लेकर आया है।
    नाती-पोतों की किलकारी, जीवन में लाया है।

    Bahut sunder

    उत्तर देंहटाएं
  23. बहुत दर्द भी है ..और बहुत सुन्दर सलाह भी है इस कविता में .. बहुत खूब... कहते हैं ना स्वस्थ रहने के लिए "कम खाना गम खाना " ये गम खाने जैसा है...

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  24. उपयोगी सीख है...
    बहुत सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  25. जीवन का एक ये भी चरण है...पर बकौल शैलेन्द्र...लड़कपन खेल में खोया...जवानी नींद भर सोया...बुढ़ापा देख कर रोया...आइये इसे हसीं बनाने की सार्थक पहल करें...

    उत्तर देंहटाएं

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