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बुधवार, 22 जून 2011

"बातों की ग़ज़ल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 
बात-बात में हो जाती हैं, देखो कितनी सारी बातें।
घर-परिवार, देश-दुनिया की, होतीं सबसे न्यारी बातें।।

रातों में देखे सपनों की, दिन भर की दिनचर्या की भी,
सुबह-शाम उपवन में जाकर, होतीं प्यारी-प्यारी बातें।

बातों का नहीं ठौर-ठिकाना, बातों से रंगीन जमाना,
गली-गाँव चौराहे करते, मेरी और तुम्हारी बातें।

बातें ही तो मीत बनातीं, बातें बैर-भाव फैलातीं,
बातों से नहीं मन भरता है, सुख-दुख की संचारी बातें।

जाल-जगत के ढंग निराले, हैं उन्मुक्त यहाँ मतवाले,
ज्यादातर करते रहते हैं, गन्दी भ्रष्टाचारी बातें।

लेकिन कोश नहीं है खाली, सुरभित इसमें है हरियाली,
सींच रहा साहित्य सरोवर, उपजाता गुणकारी बातें।

खोल सको तो खोलो गठरी, जिसमें बँधी ज्ञान की खिचड़ी,
सभी विधाएँ यहाँ मिलेंगी, होंगी विस्मयकारी बातें।

नहीं रूप है, नहीं रंग है, फिर भी बातों की उमंग है,
कभी-कभी हैं हलकी-फुलकी, कभी-कभी हैं भारी बातें।   

31 टिप्‍पणियां:

  1. सुनता है फिर गुनता है जो-
    गुरुजन की संस्कारी बातें ||
    दिल में घर कर लेता है वो --
    करता है जो प्यारी बातें ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. बातो में बात चली है ....वही तो सबके साथ चली है
    दुनिया की भीड़ में ...वो ही तो दिन रात चली है

    उत्तर देंहटाएं
  3. क्या बात है! आपकी 'प्यारी बातें' भी लाज़बाब हैं

    उत्तर देंहटाएं
  4. नहीं “रूप” है, नहीं रंग है, फिर भी बातों की उमंग है,
    कभी-कभी हैं हलकी-फुलकी, कभी-कभी हैं भारी बातें।

    रूप रंग ना होने पर भी क्या से क्या कर जाती है बातें
    कभी ते्रे तो कभी मेरे दिल की कह जाती है ढेर सारी बातें

    उत्तर देंहटाएं
  5. अच्‍छी रचना

    बातों से तो बडी से बडी समस्‍या का हल निकल जाता है

    सार्थक पोस्‍ट

    उत्तर देंहटाएं
  6. रातों में देखे सपनों की, दिन भर की दिनचर्या की भी,
    सुबह-शाम उपवन में जाकर, होतीं प्यारी-प्यारी बातें!

    बहुत सच कहा है...बहुत सार्थक और सुन्दर प्रस्तुति!

    उत्तर देंहटाएं
  7. क्या बात है ! बहुत सुन्दर..

    उत्तर देंहटाएं
  8. बातों ही बातों में सुन्दर बात । सुबह शाम दिन हो या रात बस होगी बात ही बात । बातों की कई किस्म

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर रचना! बातों से ही दिन की शुरुआत होती है और बातों बातों में ही अनेक समस्याओं का हल होता है!

    उत्तर देंहटाएं
  10. बात निकलती, बढ़ती रहती,
    बातों में बातों की बातें।

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ख़ूब ।
    सादा अंदाज़ में हक़ीक़त का बयान है यह।
    http://tobeabigblogger.blogspot.com/2011/02/create-blog.html

    उत्तर देंहटाएं
  12. जाल-जगत के ढंग निराले, हैं उन्मुक्त यहाँ मतवाले,
    ज्यादातर करते रहते हैं, गन्दी भ्रष्टाचारी बातें।
    सार्थक रचना। गहन भाव लिए आपकी शैली (जिसका जवाब नहीं) का जादू न सिर्फ़ दिल को छूता है बल्कि मन-मस्तिष्क के लिए भी बहुत कुछ दे जाता है।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बातों पर बहुत सुन्दर बातें लिख दीं आपने…………बातों से बातें निकालना कोई आपसे सीखे। बहुत सुन्दर्।

    उत्तर देंहटाएं
  14. गली -गाँव चौराहे करते ,मेरी और तुम्हारी बातें ...,
    ....कभी कभी हैं हलकी फुलकी ,कभी कभी हैं भारी बातें ।
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति आभार -
    (इसमें जोड़ों मेरे भैया लक्ष्मी और उल्लू की बातें .शुक्रिया सटीक टिपण्णी के लिए ,लक्ष्मी का वाहन यही भारतीय राजनीति का उलूक है ).

    उत्तर देंहटाएं
  15. लेकिन कोश नहीं है खाली, सुरभित इसमें है हरियाली,
    सींच रहा साहित्य सरोवर, उपजाता गुणकारी बातें

    जय हो जय हो जय हो

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सारी बातों को समेटे अच्छी गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  17. बातें ही तो मीत बनातीं,
    बातें बैर-भाव फैलातीं,
    बातों से नहीं मन भरता है,
    सुख-दुख की संचारी बातें।


    बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी ग़ज़ल !
    हार्दिक शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  18. Guru ji appney sahi kaha hai baatey to kabhi nahi khattam hoti hai, woo koi bhi baatey ho, baatto mey hi sey to baatey nikaal thi hai.

    उत्तर देंहटाएं
  19. guru ji hai hamery Mahan,
    wo karey hai baatey mahan,
    ish leyey to woo sebkey piyarey hai,
    ish leyey raj dularey hai.

    उत्तर देंहटाएं
  20. बातों की है बात निराली होती कितनी प्यारी बातें
    बात बात में बतकत चला कर हुई आपसे कितनी बातें

    उत्तर देंहटाएं
  21. बहुत सुन्दर शास्त्री जी

    बड़ी प्यारी लगी आपकी गीतिका (हिंदी ग़ज़ल)

    उत्तर देंहटाएं

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