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शनिवार, 4 जून 2011

"बिटिया तुम हो कितनी प्यारी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


प्यारी-प्यारी गुड़िया जैसी,
बिटिया तुम हो कितनी प्यारी।
मोहक है मुस्कान तुम्हारी,
घरभर की तुम राजदुलारी।।

नये-नये परिधान पहनकर,
सबको बहुत लुभाती हो।
अपने मन का गाना सुनकर,
ठुमके खूब लगाती हो।।
निष्ठा तुम प्राची जैसी ही,
चंचल-नटखट बच्ची हो।
मन में मैल नहीं रखती हो,
देवी जैसी सच्ची हो।।

दिनभर के कामों से थककर,
जब घर वापिस आता हूँ।
तुमसे बातें करके सारे,
कष्ट भूल मैं जाता हूँ।।

मेरे घर-आगँन की तुम तो,
नन्हीं कलिका हो सुरभित।
हँसते-गाते देख तुम्हें,
मन सबका हो जाता हर्षित।।

16 टिप्‍पणियां:

  1. दिनभर के कामों से थककर,
    जब घर वापिस आता हूँ।
    तुमसे बातें करके सारे,
    कष्ट भूल मैं जाता हूँ।।

    ...बहुत सच कहा है..बिटिया तो होती ही हैं खुशी का खज़ाना..बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  2. इनकी मासूम मुस्कान ,दिन भर की थकावट में आराम |

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही मनभावन बाल गीत्………॥और फिर बेटी पर हो तो कहना ही क्या।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज निष्ठा के लिए बड़े ही अहोभाग्य का दिन है . इधर आपने और उधर सरस पायस में रवि जी ने उस पर सुन्दर सुन्दर कविता लिखीं हैं . बधाई हो .

    http://abhinavsrijan.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  5. मुझे बच्चों से बहुत प्यार है!
    विशेषतया बालिकाओं से!
    सच पूछा जाए तो
    बच्चे ही मेरी बाल रचनाओं के प्रेरणास्रोत हैं!

    उत्तर देंहटाएं
  6. Betiyaan Sachmuch Bahut Pyari Hoti hain..... Kaash har Hindustani ki samajh me ye baat aa paati toh...,
    Bahut hi sundar Kavita.

    उत्तर देंहटाएं

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