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बुधवार, 1 जून 2011

"मेंढक लाला बहुत निराला" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

टर्र-टर्र चिल्लाने वाला!
मेंढक लाला बहुत निराला!!
कभी कुमुद के नीचे छिपता,
और कभी ऊपर आ जाता,
जल-थल दोनों में ही रहता,
तभी उभयचर है कहलाता,
पल-पल रंग बदलने वाला!
मेंढक लाला बहुत निराला!!
लगता है यह बहुत भयानक,
किन्तु बहुत है सीधा-सादा,
अगर जरा भी आहट होती,
झट से पानी में छिप जाता,
उभरी-उभरी आँखों वाला!
मेंढक लाला बहुत निराला!!
मुण्डी बाहर करके अपनी,
इधर-उधर को झाँक रहा है,
कीट-पतंगो को खाने को,
देखो कैसा ताँक रहा है,
उछल-उछल कर चलने वाला!
मेंढक लाला बहुत निराला!!
(छायांकनःडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

28 टिप्‍पणियां:

  1. वाह्……………बहुत सुन्दर चित्रमय बाल गीत्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. sach me aapne to bahut hi pyara si ek baal kavita rachi hai...!!'
    aapke kya kahne hain...har vidha pe sir aap ki ek alag chhavi hai!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह जी वाह.. मेंढक लाला वाकई में बड़े निराले हैं...
    बहुत सुंदर बाल गीत...लाजवाब

    उत्तर देंहटाएं
  4. बच्चों के लिए बहुत ही बढ़िया कविता लिखी है आपने.

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह, जी, वाह, मज़ा आ गया!
    --
    रंग बदलनेवाले भयानक मेढक पर
    इतना प्यारा गीत पढ़कर!
    --
    कवि राकेश चक्र का
    मेढक लाला, चक्र निराला
    की याद आ गई!

    उत्तर देंहटाएं
  6. मुझे मेढक बिलकुल अच्छा नहीं लगता ..पर आपकी कविता अच्छी लगी.

    उत्तर देंहटाएं
  7. मेरे लिये एक नई बात उभयचर ।उभरी आखों वाला उछल उछल कर चलने वाला । यह मात्र बाल कविता ही नहीं है उस प्राणी का सम्पूर्ण चित्रण है

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी बच्चो के लिये लिखी कविताये बेहद मोहक होती हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. क्या बात है .... बहुत बढ़िया सरल शब्दों में आपने बहुत अच्छे से मेंढकलालाजी के बारे में बताया है

    उत्तर देंहटाएं
  10. मेंढक को प्राकृतिक सौन्दर्य का हिस्सा पहली बार जानकर पढ़ा।

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  11. एक अति सुन्दर प्रस्तुति!!!

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  12. बहुत रोचक बाल गीत...फोटो बहुत सुन्दर..आभार

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  13. आपने तो इस उभचर प्राणी के हैबिट और हैबिटैट को काव्यात्मक रूप दे दिया।
    और वो जो चित्र है ... ‘कुमुद के नीचे छिपता’ वाला ... अद्भुत और कमाल का है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. वाह शास्त्री जी, आपकी तेज निगाह से कोई चीज नहीं चूकती..

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  15. बाल मन को आनन्दित करने वाली रचना है.

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  16. bachpan me padhte the ek kavita ...dhol bajata medak aaya.utna hi maja aapki is medak ki kavita padhne me aaya hai.bahut achcha baalgeet.

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  17. सुन्दर गीत। एक दफा बरेली के एक मेंढक ने मेरी ज़िन्दगी बदल डाली थी।

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  18. बहुत ख़ूबसूरत और रोचक बालगीत! मेढक के चित्र भी अच्छे लगे!

    उत्तर देंहटाएं
  19. मेढक को उभयचर क्यूँ कहते हैं, बड़ी ही आसानी से समझा दिया आपने

    उत्तर देंहटाएं
  20. वाह .. बहुत ही सुन्‍दर सचित्र प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  21. sunder saral kavita ....photo ke saath to aur majedaar ho gayi hai rachana

    http://drsatyajitsahu.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं

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