"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शनिवार, 11 जून 2011

"गीत-...मैं साँड तबेले वाला हूँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मित्रों! किसी बड़ी खराबी के चलते
आज पूरे दिन मेरे यहाँ बिजली रानी नहीं आई!
अभी शाम को यह हास्य गीत बन पड़ा है!
यह यद्यपि मेरे मिज़ाज़ का नहीं है
लेकिन बन गया है तो आप भी इसका आनन्द लीजिए!
--
तुम महानगर की साड़ी हो,
मैं कुरता भोला-भाला हूँ।
तुम बिजली वाली गाड़ी हो,
मैं धीमे चलने वाला हूँ।

बालों-गालों को रंग करके,
तुम अल्हड़-मस्त जवानी सी,
मेरे चाँदी से केश देख,
सब लोग उड़ाते बहुत हँसी,
तुम सड़कों पर बलखाती हो,
मैं साँड तबेले वाला हूँ।
भर कर सोलह सिंगार प्रिये,
तुम नूतन वेश सजाती हो,
देवों के दर्शन करने को,
तुम कभी न मन्दिर जाती हो,
तुम क्लब जाकर लहराती हो,
मैं कथा-कीर्तन वाला हूँ।
इसीलिए तो कहता हूँ,
मत रचो प्यार का खेल प्रिये!
चन्दा का और चकोरी का,
है बहुत असम्भव मेल प्रिये!
तुम चाट-पकौड़े खाती हो,
मैं चना-चबेना वाला हूँ।।

28 टिप्‍पणियां:

  1. "Mai Saand Tabeley Wala Hun" Is Sheershak Ke Saath Saath Geet Bhi Achchha Banaya Hai. Wah...Wah...

    उत्तर देंहटाएं
  2. शास्त्री जीईईईई (इतने भोले न बनो ...!)
    बहुत अच्छा लिखा है ...“मैं साँड तबेले वाला हूँ"

    उत्तर देंहटाएं
  3. ये मेल अदभुत होगा...तबेले का सांड और बलखाती सड़क...विपरीत ध्रुवों को आकृष्ट होना चाहिए...आप कुछ नहीं कर सकते...

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut hi majedaar adbhut male darsaati hasya paida karati hui anokhi rachanaa.badhaai sweekaren.aabhar.

    उत्तर देंहटाएं
  5. लेकिन ट्राई करने में कोई हर्ज नहीं है !!!!!!
    बहुत मज़ेदार!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर आपके मेल की नही है पर . ..मुझे तो बहुत अच्छी लगी ..पसंद भी आई ..आपकी कथनी निराली है शास्त्री जी !

    मजा आ गया ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. shastri ji aapne kaha hai-

    भर कर सोलह सिंगार प्रिये,
    तुम नूतन वेश सजाती हो,
    देवों के दर्शन करने को,
    तुम कभी न मन्दिर जाती हो,
    तुम क्लब जाकर लहराती हो,
    mere anusar-
    bhar kar solah singar priy
    tum nutan vesh sajati ho.
    devon ke darshan karne ko
    tum saj-dhaj mandir jati ho .
    aur naz vahan dikhlati ho
    maine aisee aisee bhi dekhi hain so likh diya.aapki prastuti bahut shandar hai.

    उत्तर देंहटाएं
  8. BAHUT SUNDAR HASY GEET-VYASJI KI YAAD AA GAYI-PAR TABELE KE SAAND KI
    KISMAT HI KUCHH AUR HOTI HAI

    HA-HA-HA
    GHOTOO

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति !
    मज़ा आ गया पढ़ के !!

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही बढ़िया और मज़ेदार लगा! सुन्दर चित्र!

    उत्तर देंहटाएं
  11. बालों-गालों को रंग करके,
    तुम अल्हड़-मस्त जवानी सी,
    मेरे चाँदी से केश देख,
    सब लोग उड़ाते बहुत हँसी,
    तुम सड़कों पर बलखाती हो,
    मैं साँड तबेले वाला हूँ।


    hahahahaahah

    is durgati ke liye kaun jimmedar hai??????

    tum chamchamaati ferari ho mai purana buldozer hun
    tum sarpat daude jaati ho main reng reng kar chalta hun.....

    उत्तर देंहटाएं
  12. maza aagaya,,,,, kya kehne maharaj aapke,,,,, maharaj ki jai ho
    is geet me ras bhi hai,, or kataksh bhi,,,,,,,, hasi bhi hai,, dukh bhi,,,,,, kamal,, plzzzzzzzzzzzzzzzzzz sab ise doobara padhe,, in lines k bahut saare meaning hai,,,

    उत्तर देंहटाएं
  13. हा हा हा……………मज़ा आ गया……………ये रंग भी निराला है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. सांड की तो लौटरी लग गई होगी इतने मनमोहक चित्र देख कर!

    उत्तर देंहटाएं
  15. स्वाद में बदलाव होना जरूरी है ...
    आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत खूब शास्त्री जी बहुत खूब !
    तुम क्लब जाकर लहराती हो मैं कथा कीर्तन वाला हूँ ।
    और उस साड़ी -शोभना ने तो मन मोह ही लिया -

    जिसकी वजह से साड़ी भी सुन्दर लग रही थी .
    कमाल करतें हैं आप .जीने का अपना बिंदास अंदाज़ हौसला रखतें हैं .

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails