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गुरुवार, 30 जून 2011

"हम वही अन्दाज़ कहना चाहते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


अपने मन की बात कहना चाहते हैं
कुछ दबे अल्फाज़ कहना चाहते हैं

कब तलक तुमसे छिपायें असलियत
कल नहीं हम आज कहना चाहते हैं

सोचकर रिश्ते बनाना अज़नबी से
राज़ हम हमराज़ कहना चाहते हैं

मधुर सुर सजता सदा आघात से
दर्द का हम साज़ कहना चाहते हैं

इश्क करना है सरल लेकिन निभाना है कठिन
दिल की हम आवाज कहना चाहते हैं

आशिको-माशूक के बिन शायरी बेजान है
हम इसे सरताज कहना चाहते हैं

सुनके जिसको “रूप” शरमाने लगे
हम वही अन्दाज़ कहना चाहते हैं

23 टिप्‍पणियां:

  1. 'कब तलक तुमसे छिपायें असलियत
    कल नहीं हम आज कहना चाहते हैं'

    अब भी देर नहीं हुई आपतो ग़ज़ल का अंदाज़ बख़ूबी जानते हैं बस शुरू हो जाइए ज़नाब...बहुत अच्छा...बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुनके जिसको “रूप” शरमाने लगे
    ग़ज़ल का अन्दाज़ कहना जानते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुनके जिसको “रूप” शरमाने लगे
    ग़ज़ल का अन्दाज़ कहना जानते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  4. आभार ||
    मैंने सुना है की सागर रत्नाकर है पर उसमे एक नाम मयंक जोड़ना होगा |
    बधाई |

    पूरी रचना में चाहते हैं
    की जगह मैं तो
    जानते हैं
    कर के पढ़ गया
    शास्त्री जी ||

    अभी अभी तो चश्मा
    बदलवाया है |
    कैसे हो गई चूक ||

    लगता है की जानने का अनुभव
    चाहत पर भारी पड़ गया ||

    उत्तर देंहटाएं
  5. भाई दिनेश चन्द्र गुप्ता "रविकर" जी!
    टाइप करने में त्रुटि हो गई थी!
    अब सुधार दी है!
    --
    बताने के लिए आपका आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  6. इश्क करना है सरल लेकिन निभाना है कठिन
    दिल की हम आवाज कहना चाहते हैं

    सटीक बात कही है ..निभाना तो हर रिश्ता मुश्किल होता है ... आज तो आप बहुत कुछ कहना चाहते हैं ...खूबसूरत गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  7. gustakhi muaf !!

    shastri ji ||

    chahte hai jaananaa ||

    jaante hain chaahanaa ||

    bhul itni ho gai --

    chaah ki thi raah na --

    उत्तर देंहटाएं
  8. आप जो भी कहना चाहते थे, बहुत स्पष्ट हम तक पहुंची।

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुनके जिसको “रूप” शरमाने लगे
    हम वही अन्दाज़ कहना चाहते है

    आपकी चाहत का अंदाज निराला है भाई जी.

    उत्तर देंहटाएं
  10. bhav v shabdon ka chayan bahut sundar laga-bas yahi kahna chahte hain .aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  11. शास्त्री जी! डरते-डरते कहना चाहूँगा कि शीर्षक में 'जानते' जैसी त्रुटि नहीं है? या हमें ही लग रहा है...और ‘इश्क करना है सरल लेकिन निभाना है कठिन’ इस वाक्य में कुछ मात्राएं जैसे ज्यादा लगती हैं एक बार ख़ुद देखिए ज़रा! क्योंकि ग़ज़ल शुद्ध छन्दबद्ध रचना होती है मात्राओं की कमी बेसी बरदास्त नहीं कर पाती

    उत्तर देंहटाएं
  12. dr. saheb aapane kahane ko hamare layak koyi andaz chhoda hi nahi sab kuchh kah diya badhayi

    उत्तर देंहटाएं
  13. सोचकर रिश्ते बनाना अज़नबी से
    राज़ हम हमराज़ कहना चाहते हैं
    bahut sarthak bhavon ko lekar aapne ye kavita likhi hai.bahut achchhi lagi.badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  14. अपने मन की बात कहना चाहते हैं
    कुछ दबे अल्फाज़ कहना चाहते हैं


    -यही तो आपकी अदा भाती है...

    उत्तर देंहटाएं
  15. अपने मन की बात कहना चाहतें हैं ,
    कुछ दबे अलफ़ाज़ कहना चाहतें हैं ।
    सहज सरल मन के स्वतः स्फूर्त ग़ज़ल .खूबसूरत काबिले तारीफ़ ।
    तारीफ़ करूँ क्या उसकी जिसने तुझे बनाया .

    उत्तर देंहटाएं
  16. इश्क करना सरल , निभाना मुश्किल ...
    सच ही !

    उत्तर देंहटाएं
  17. bahut hi achche jajbaaton ko mahsoos karati hui ye ghazal kamaal ki hai.

    उत्तर देंहटाएं
  18. सहजता से आत्मसात हो जाने वाली पंक्तिया

    उत्तर देंहटाएं

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