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रविवार, 26 जून 2011

"कब मुलाकात होगी-गुरूसहाय बदनाम" (प्रस्तोता-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


आज पढ़िए बदनाम साहिब की यह दिलकश ग़ज़ल
कब मुलाकात होगी

नज़र से नज़र की मुलाकात होगी
इशारों-इशारों में जब बात होगी

वो जुल्फ़ों को अपनी विखेरेंगे जब-जब
घटाओं से घिर-घिर के बरसात होगी

लबों पे तबस्सुम की हल्की सी जुंबिश
हंसी शोख चंचल सी इक बात होगी

बढ़ेगी फिर उनसे मोहब्बत यहाँ तक
मिलन की फिर उनके शुरूआत होगी

वो शरमा के जब अपने लब खोल देंगे
मोहब्बत के फूलों की बरसात होगी

वो चल तो दिये दिल में तूफॉ उठाये
फिर ‘बदनाम’ से कब मुलाकात होगी
(गुरूसहाय भटनागर "बदनाम")

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत-बहुत बदनाम है, ये शायर तो यार |

    बड़े तरन्नुम से पढ़ी , रचना आशिक मार |

    रचना आशिक मार, बात तो लिखकर होगी |

    करे इशारे रोज, बहुत बड़का ये ढोंगी |

    है रविकर बदनाम, करेगा गड़बड़ रातें |

    दिल में ले तूफ़ान , करे क्यूँ मुलाकातें ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. बदनाम साहब से परिचय करवाने के लिये आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. जब तूफां थमेगा,
    कुछ होश सा बनेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  4. वो चल तो दिये दिल में तूफॉ उठाये
    फिर ‘बदनाम’ से कब मुलाकात होगी badnaam sahab ki gajal bahut achchi lagi.aapka aabhaar ki aapke madhyam se hamko bhi itani achchi gajal padhne ko mili.thanks.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बदनाम साहब की ग़ज़ल अच्छी लगी - धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं
  6. dr saahb ne resarch karke bhtrin gzal pesh ki hai mubark ho.. akhtar khan akela kota rajsthan

    उत्तर देंहटाएं
  7. वो चल तो दिये दिल में तूफॉ उठाये
    फिर ‘बदनाम’ से कब मुलाकात होगी
    bahut sundar

    उत्तर देंहटाएं
  8. शानदार प्रस्तुति! लाजवाब!!
    बहुत सरस ग़ज़ल।

    उत्तर देंहटाएं
  9. वो शरमा के जब अपने लब खोल देंगे
    मोहब्बत के फूलों की बरसात होगी
    बहुत खुबसूरत, मुहब्बत की कहानी सुना रहा है हर शेर शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  10. बदनाम साहब की ग़ज़ल अच्छी लगी!

    उत्तर देंहटाएं
  11. वो शरमा के जब अपने लब खोल देंगे
    मोहब्बत के फूलों की बरसात होगी
    आभार

    उत्तर देंहटाएं

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