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मंगलवार, 7 जून 2011

"हास्यगीत-चप्पल-जूता मम्मी जी!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मित्रों आज कुछ लिखने का मन तो नहीं था,
मगर भाई अरुणेश सी दवे के आग्रह पर
यह हलका-फुलका हास्य गीत लिखने का
असफल प्रयास किया है!
तन से हिन्दुस्तानी हूँ, लेकिन मन गोरा मम्मी जी!
इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!!

अपनी सभ्य-सुसंस्कृत भाषा, नहीं बोल मैं पाता हूँ
अंग्रेजों की जूठन को तो, बहुत चाव से खाता हूँ,
आँख मूँदकर, तोता बनकर रटता जाता मम्मी जी!
इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!!

कुर्सी पर बैठाया तो है, लेकिन दास बना डाला,
भरी तिजोरी मुझको सौंपी, लेकिन लटकाया ताला,
चाबी का गुच्छा तुमने खुद ही कब्ज़ाया मम्मी जी!
इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!

खाती हो अपने घर का, लेकिन मैके का गुण गाती,
परदे के पीछे रहकर, तुम अपना कहना मनवाती,
मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!!

51 टिप्‍पणियां:

  1. कुर्सी पर बैठाया तो है, लेकिन दास बना डाला,
    भरी तिजोरी मुझको सौंपी, लेकिन लटकाया ताला,
    चाबी का गुच्छा तुमने खुद ही कब्ज़ाया मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!
    वाह! शास्त्री जी! बहुत खूब लिखा है आपने! कार्टून तो मज़ेदार है और साथ ही साथ रचना भी बहुत ज़बरदस्त लगा!

    उत्तर देंहटाएं
  2. खाती हो अपने घर का, लेकिन मैके का गुण गाती,
    परदे के पीछे रहकर, तुम अपना कहना मनवाती,
    मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!

    व्यंग भरी ... एक सच्चाई !!!
    आज जरूरत है इसकी ..
    शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  3. हास्य को भी आपने अच्छी तरह निभाया है !

    उत्तर देंहटाएं
  4. मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी
    जबरदस्त.

    उत्तर देंहटाएं
  5. हास्य गीत में सटीक और करार व्यंग है ..बहुत बढ़िया

    उत्तर देंहटाएं
  6. शानदार लिखा है सर आपने बहुद बढ़िया

    एक तमाचा है ये कई लोगो के गालो पर जरिरी ये है की ये उन लोगो तक पहुंचे भी

    उत्तर देंहटाएं
  7. सही लीक मिला कर आपने जूता लगाया है, बस ऐसे ही जूतों की दरकार है इस सरकार को. बहुत मजा आया .

    उत्तर देंहटाएं
  8. तस्वीर के अनुरूप अच्छा हास्य इस कविता में.

    उत्तर देंहटाएं
  9. वह शास्त्री जी मजेदार लिखा है आपने अपनी कविता के माध्यम से आपने सच कह दिया! आप लोग मेरे ब्लॉग पर् भी आये! ब्लॉग है सम्राट बुंदेलखंड ब्लॉग पर् आने के लिए यहाँ क्लिक करे!-"samrat bundelkhand"

    उत्तर देंहटाएं
  10. हहहहहः बहुत ही अच्छा है मज्जा अ गिया !अपना महत्वपूर्ण टाइम निकाल कर मेरे ब्लॉग पर जरुर आए !
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    उत्तर देंहटाएं
  11. Shastriji,Vyang kavyo ke jarie Mahir Kavi thode hi labzo me bahut kuchh keh sakta hai.Aap ne bhi bahyachar aur real charactor bakhubi se ooksaya hai.Shakti-maan dikhaya muze aur Shakti hai aapki.

    उत्तर देंहटाएं
  12. खाती हो अपने घर का, लेकिन मैके का गुण गाती,
    परदे के पीछे रहकर, तुम अपना कहना मनवाती,
    मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!!

    भई वाह बहुत जबरदस्त....

    उत्तर देंहटाएं
  13. खाती हो अपने घर का, लेकिन मैके का गुण गाती,
    परदे के पीछे रहकर, तुम अपना कहना मनवाती,
    मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!!
    hasya-byang per likhi aaj kal ki isthti per satic aur bahut hi badiyaa rachanaa.badhaai sweekaren.

    उत्तर देंहटाएं
  14. हा हा हा दादा नाम मेरा लगा दिया पहले ही मुझ से खार खाये कांग्रेसी अब मुझे छोड़ेंगे नही

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ही असरदार गीत। हास्य से व्यंग्य की ओर जाता यह गीत समसामयिक भी है।

    उत्तर देंहटाएं
  16. मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!!

    Mazedar .
    Poori rachna hi lajawaab hai aur iske Prawaah to adbhut hai. Aasani se zabaan par chadh jati hai .

    उत्तर देंहटाएं
  17. मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी
    वाह शास्त्री जी करारा व्यंग, आपकी लेखनी के आयाम देखकर आश्चर्य होता है , बधाई अभिवादन

    उत्तर देंहटाएं
  18. शानदार व्यंग , शास्त्री जी । बहुत ही उम्दा।

    उत्तर देंहटाएं
  19. खाती हो अपने घर का, लेकिन मैके का गुण गाती,
    परदे के पीछे रहकर, तुम अपना कहना मनवाती,
    मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!!
    ...करारा व्यंग बहुत मज़ेदार है....

    उत्तर देंहटाएं
  20. खाती हो अपने घर का, लेकिन मैके का गुण गाती,
    परदे के पीछे रहकर, तुम अपना कहना मनवाती,
    मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!

    Bahut Badhiya... :)

    उत्तर देंहटाएं
  21. बहुत ही तीखा व्यंग...मज़ा आ गया...मम्मी जी और उनका बेटा गया...तेल लेने...

    उत्तर देंहटाएं
  22. मैं सरदार नाम का हूँ, तुम असरदार हो मम्मी जी!
    इसीलिए तो उछल रहा है, चप्पल-जूता मम्मी जी!!
    बहुत खुब जी मजा आ गया, इन दोनो को एक एक जुता हमारी तरफ़ से भी, लेकिन भिगो भिगो के...

    उत्तर देंहटाएं
  23. " maza a gaya sir ...kya mast juta mara hai aapne ....haaaaa....ha aaj ke daur ka sahi chitran "

    उत्तर देंहटाएं
  24. गज़ब की धारदार और शानदार व्यंग्य रचना . आभार .

    उत्तर देंहटाएं
  25. agar ye halka-fulka hasye geet hai to, bhari bharkam kya hoga, Manmohan pyare ji aur kya kya likhbaoge apne bare main! maja aaya sir ji! is halke fulke se kam bhari-bharkam ho gaya! lekin jo soye huye hain unka kya!
    shaan dar geet!

    उत्तर देंहटाएं
  26. hahahahhaha...........bahut khub bhai ji
    maza aa gaya padh ke

    उत्तर देंहटाएं
  27. अरे वाह! क्या बात है? वैसे हम तो ख़ूब हँसेंगे पर बेशर्मो पर क्या फ़र्क पड़ने वाला?

    उत्तर देंहटाएं
  28. शास्त्री जी! आपका हास्य लाज़वाब है ज़रा इसपर भी ग़ौर फ़रमाएं-

    "ज़ुल्मो-सितम को ख़ाक करने के लिए,
    लाज़िमी है कुछ हवा की जाय और।
    उस लपट की ज़द में तो आएगा ही;
    बाबा या नाती या चाहे कोई और।।

    एक जब फुंसी हुई ग़ाफ़िल थे हम,
    शोर करने से नहीं अब फ़ाइदा।
    अब दवा ऐसी हो के पक जाय ज़ल्द;
    बस यही है इक कुदरती क़ाइदा।।

    वर्ना जब नासूर वो हो जाएगी,
    तब नहीं हो पायेगा कोई इलाज।
    बदबू फैलेगी हमेशा हर तरफ़;
    कोढ़ियों के मिस्ल होगा यह समाज।।"

    उत्तर देंहटाएं
  29. वाह ये हुआ ना शानदार व्यंग्य्………………असरदार्……………बेह्द उम्दा।

    उत्तर देंहटाएं
  30. मैं सरदार नाम का हूँ ,तुम असरदार हो मम्मीजी ,
    इसीलिए तो उछल रहा है ,चप्पल जूता मम्मीजी ।
    वाह डॉ .रूप चंद शाष्त्री जी मयंक "एक बिजूके "एक क्रो स्केयर बार को सरदार कहा आपने ।
    एक बिजूके को सरदार बनाया खूब आपने मम्मी जी ,
    कितनी और तारीफ़ करूं,मैं आज आपकी मम्मीजी !

    उत्तर देंहटाएं
  31. मैं सरदार नाम का हूँ ,तुम असरदार हो मम्मीजी ,
    इसीलिए तो उछल रहा है ,चप्पल जूता मम्मीजी ।
    वाह डॉ .रूप चंद शाष्त्री जी मयंक "एक बिजूके "एक क्रो स्केयर बार को सरदार कहा आपने ।
    एक बिजूके को सरदार बनाया खूब आपने मम्मी जी ,
    कितनी और तारीफ़ करूं,मैं आज आपकी मम्मीजी !

    उत्तर देंहटाएं
  32. एक बिजूके को तुमने सरदार बनाया मम्मी जी ,
    सिर पे कौवे आ बैठे ,कैसा धिक्कार है मम्मी जी ।
    शाष्त्री जी जल्दी ही इसका "सह -भावित रिमिक्स आ रहा है "।
    आभार आपका तनाव कम हो गया जो देश के स्थिति ने बना दिया था .

    उत्तर देंहटाएं

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