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सोमवार, 27 जून 2011

"चूस मकरन्द भँवरे किनारे हुए" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 
उनके आने से दिलकश नज़ारे हुए
मिल गई जब नज़र तो इशारे हुए

आँखों-आँखों में बातें सभी हो गईं
हो गये उनके हम वो हमारे हुए

रस्मों-दस्तूर की बेड़ियाँ तोड़कर
अब तो उन्मुक्त पानी के धारे हुए

सारी कलियों को खिलना मयस्सर नहीं
सूख जातीं बहुत मन को मारे हुए

कितने खुदगर्ज़ आये-मिले चल दिये
मतलबी यार सारे के सारे हुए

जो दिलों की हैं धड़कन को पहचानते
बेसहारों के वो ही सहारे हुए

रूप-रस का है लोभी जमाना बहुत
चूस मकरन्द भँवरे किनारे हुए

32 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत खूब रस के साथ अच्छा वर्णन किया है आपने
    रस्मों-दस्तूर की बेड़ियाँ तोड़कर
    अब तो उन्मुक्त पानी के धारे हुए

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूब शास्त्री जी ||


    वो प्यारी हुई- ये प्यारे हुए |

    दीवानी हुए - दिल हारे हुए |

    रास्ता कट रहा है मजे से बहुत

    एक-दूजे के पक्के सहारे हुए ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut achjal gjalen likhten hain aap inko padhker hum prasansak aapki rachanaon ke hue,badhaai itani achchi gajal likhne ke liye.

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह शास्त्री जी! क्या ख़ूब रचना है...सच में 'चूस मकरन्द भंवरे किनारे हुए...'

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत खूब लिखा है जनाब ...चूस मकरंद भंवरे किनारे हुए 'क्या बात है !

    उत्तर देंहटाएं
  6. जब बांध टूट जाता है तो किनारे उन्मुक्त हो ही जाते हैं...
    बहुत ही बढ़िया....

    उत्तर देंहटाएं
  7. जब बांध टूट जाता है तो किनारे उन्मुक्त हो ही जाते हैं...बहुत ही बढ़िया....

    उत्तर देंहटाएं
  8. जो दिलों की हैं धड़कन को पहचानते
    bahut sundar bhav bhare hain shandar abhivyakti.badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  9. चूस मकरंद भँवरे किनारे हुए .....बहुत खूब ---याद आ गईं ये पंक्तियाँ -
    जब तक पैसा पास यार संग ही संग डोले ,
    पैसा रहा न पास यार मुख से नहीं बोले .

    उत्तर देंहटाएं
  10. स्वार्थ भरा है इस दुनिया में,
    करे क्या, यही रहना है।

    उत्तर देंहटाएं
  11. खुदगर्जी का दूसरा रूप है यह भौंरा।

    उत्तर देंहटाएं
  12. जो दिलों की हैं धड़कन को पहचानते
    बेसहारों के वो ही सहारे हुए

    बहुत ख़ूबसूरत गज़ल...

    उत्तर देंहटाएं
  13. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 28 - 06 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच-- 52 ..चर्चा मंच

    उत्तर देंहटाएं
  14. रूप”-रस का है लोभी जमाना बहुत
    चूस मकरन्द भँवरे किनारे हुए
    bahut khoob

    उत्तर देंहटाएं
  15. जड़ को सींचा, बहुत मीठे जल से मगर
    फल " नयन - वृक्ष " के सारे खारे हुए.

    उत्तर देंहटाएं
  16. jounk jaisi rachana ,hum bhi achhute nahin hai vyang bhi achha sadhuwad dr. saheb

    उत्तर देंहटाएं
  17. very nice poem Shastri ji.
    It has suggestive meaning in all fields of day-today life...........great

    उत्तर देंहटाएं
  18. जो दिलों की हैं धड़कन को पहचानते
    बेसहारों के वो ही सहारे हुए...

    ऐसे भी लोग बचे हुए हैं तो क्या हुआ जो ...
    मतलबी यार सारे के सारे हुए!

    उत्तर देंहटाएं
  19. आँखों-आँखों में बातें सभी हो गईं
    हो गये उनके हम वो हमारे हुए
    सहजता क्र साथ कितने बड़े घाव दे दिए ,...... उम्दा सृजन सर ! शुक्रिया जी /

    उत्तर देंहटाएं
  20. nice hai mayank daa

    जो दिलों की हैं धड़कन को पहचानते
    बेसहारों के वो ही सहारे हुए

    sab mushkilen mit gayi
    jab kaana khevanhaare hue

    marubhumi me bhi hariyaali aa jaaye
    jab ham prabhu ke dwaare hue

    heere moti ka ham kya karen
    pee ka saath hame sanwaare hue

    chiraag-e-dil jalti rahegi hamaari
    kya hua jo khudgarz chaand-sitaare hue

    diye banaane waale kumhaar se poocho
    kitne gharon me ujiyaare hue

    "roop" hai tera tab tak "neel"
    jab tak tere karm pyaare hue

    उत्तर देंहटाएं
  21. बहुत बढ़िया लिखा है ...
    आजकल की यही हवा है ...

    उत्तर देंहटाएं
  22. बहुत खूबसूरत गज़ल है... दाद कबूल करें.

    उत्तर देंहटाएं
  23. उनके आने से दिलकश नज़ारे हुए
    मिल गई जब नज़र तो इशारे हुए

    आँखों-आँखों में बातें सभी हो गईं
    हो गये उनके हम वो हमारे हुए

    प्रेम रस से सराबोर सुन्दर रचना के लिये हार्दिक बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  24. प्रतिभा के धनी है आप

    बहुत खूब .....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  25. वाह ... बहुत खूब कहा है आपने ।

    उत्तर देंहटाएं
  26. जो दिलों की हैं धड़कन को पहचानते
    बेसहारों के वो ही सहारे हुए....बहुत खूबसूरत गज़ल है..
    .आभार...

    उत्तर देंहटाएं

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