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बुधवार, 6 जुलाई 2011

"लोकपाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



लोकपाल
लोकतन्त्र में मचा बबाल
मन में उठ रहे हैं
बहुत से सवाल
छटपटा रहे हैं
कुर्सी के लाल
क्या होगा अब
काले धन का हाल
इसी लिए तो
तमतमा रहे हैं उनके गाल
शर्म से नहीं
गुस्से से चेहरा है लाल
अन्ना हो या बाबा
काशी हो या काबा
नज़र आ रहें हैं इनके भीतर
भ्रष्टाचारियों को दुश्मन
क्योंकि
उजले तन में
छिपा हुआ है काला मन
प्रश्न है विकराल
बुने जा रहे हैं जाल
क्या बन पायेगा
लोकपाल??

21 टिप्‍पणियां:

  1. सही मुद्दे को लेकर आपने बहुत ही शानदार रूप से प्रस्तुत किया है! न जाने कब हमारे देश से भ्रष्टाचारी ख़त्म होगी! कभी बाबा रामदेव तो कभी कोई नेता प्रतिदिन अख़बार और न्यूज़ में हमारे देश की हालत के बारे में सुनने को मिलता है!

    उत्तर देंहटाएं
  2. नेता कलम की मार से बच न पायंगे
    नेता जो भी कहे सच ना पायेंगे

    बहुत अच्छा लिखा है आपने

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी चिंता उचित है शास्त्री जी.
    काले धन से अधिक काले मन की अधिक चिंता है.
    क्यूंकि काले धन का कारण भी तो काला मन ही है.

    मेरे ब्लॉग पर अभी तक आपके दर्शन नहीं हुए हैं.
    लगता है आमों की दावत लंबी चल रही है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. चले हुए नौ-दिन हुए, चला अढ़ाई कोस |

    लोकपाल का करी शुभ्र, तनिक होश में पोस || करी = हाथी

    उत्तर देंहटाएं
  5. ...
    क्योंकि
    उजले तन में
    छिपा हुआ है काला मन
    प्रश्न है विकराल
    बुने जा रहे हैं जाल
    क्या बन पायेगा ?
    सवाल बड़ा विकराल है
    सचमुच बड़ा बुरा हाल है

    सटीक चित्रण !

    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  6. प्रश्न है विकराल
    बुने जा रहे हैं जाल

    बहुत सही कहा है आपने ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. ्बहुत कठिन है डगर पनघट की

    उत्तर देंहटाएं
  8. एक सवाल में कई सवाल...होगा भी कोई लोकपाल...हो जाए तब अहं सवाल...कैसा होगा लोकपाल

    उत्तर देंहटाएं
  9. पढ़ शास्त्री जी का ये सवाल ...?
    सफ़ेदपोशों का होगा, बुरा हाल |
    शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  10. पता नहीं क्या बन पायेगा..

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सार्थक और सुन्दर रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  12. सही कहा...शर्म से नहीं...गुस्से से इनके चेहरे लाल हो रहे हैं...

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  13. dr.sahib lokpal nahi banega,yadi bana bhi to usake upar bhi ek?????pal baithana padega thanx

    उत्तर देंहटाएं
  14. हमें भी लोकपाल का इंतज़ार है पर हम वो दिन नहीं देखना चाहते जब ये लोकपाल भी बेअसर एक्ट्स की कतार में खड़ा नज़र आए|

    उत्तर देंहटाएं

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