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शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

"दोहा सप्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


गंगा, यमुना-शारदा, का संगम अभिराम।
श्रम, बुद्धि औज्ञान से, बनते सारे काम।1।

ले जाता है गर्त में, मानव को अभिमान।
जो घमण्ड में चूर हैं, उनको गुणी न जान।2।

चूहा कतरन पाय कर, थोक बेचता वस्त्र।
अज्ञानी ही घोंपता, ज्ञानवान को शस्त्र।3।

हो करके निष्काम जो, बाँट रहा है ज्ञान।
कोशिश करता वो यही, मिट जाए अज्ञान।4।

जो भी असली शिष्य हैं, वो गुरुओं के भक्त।
जो कृतघ्न थे हो गये, पाकर हुनर विरक्त।5।

जब जग को लगने लगा, डूब रही है नाव।
बिन माँगे देने लगे, अपने कुटिल सुझाव।6।

बात-चीत से धुल गये, मन के सब सन्ताप।
गुरू-शिष्य अब मिल गये, रहा न पश्चाताप।7।

23 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत-बहुत आभार है,
    गुरुजन बड़े महान,
    त्रुटियाँ सशोधित हुईं,
    बढ़ी मंच की शान ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. सार्थक सन्देश देते बहुत सुन्दर दोहे..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. जो भी असली शिष्य हैं, वो गुरुओं के भक्त।
    जो कृतघ्न थे हो गये, पाकर हुनर विरक्त।

    सच कहा है....

    उत्तर देंहटाएं
  4. ले जाता है गर्त में, मानव को अभिमान।
    जो घमण्ड में चूर हैं, उनको गुणी न जान।2।
    बहुत खूब कहा है आपने

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्रिय शास्त्री जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    ले जाता है गर्त में, मानव को अभिमान।
    जो घमण्ड में चूर हैं, उनको गुणी न जान।


    लेकिन ऐसे कुंठित मिल ही जाते हैं … नेट पर भी मिले हैं … और उन्हें गुणी समझने का भ्रम भी टूटा है … :)

    सारे दोहे अच्छे हैं …
    ( लेकिन 'अज्ञानी ही भोंकता' में भोंकता की जगह घौंपता करदें तो अर्थ अधिक स्पष्ट हो जाएगा । )

    मैंने भी ताज़ा पोस्ट में दोहे लगाए हैं … मैंने लिखा है -

    अल्लाहो-अकबर कहें ख़ूं से रंग कर हाथ !
    नहीं दरिंदों से जुदा उन-उनकी औक़ात !!

    दाढ़ी-बुर्के में छुपे ये मुज़रिम-गद्दार !
    फोड़ रहे बम , बेचते अस्लहा-औ’-हथियार !!


    सारे दोहे पढ़ने के लिए आइएगा और आ'कर विचार रखिएगा …

    हार्दिक शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  6. ऐसा गुरु कहाँ पाईये,जैसा कहे कबीर.
    गुरु हो गया लालची,जेब से रखे सीर.
    डॉ.साहेब कम शब्दों में गहरी बात कही .साधुवाद

    उत्तर देंहटाएं
  7. अच्छे दोहें हैं
    लगता है कोई गूड (गहन) बात छिपी है इनमें.

    उत्तर देंहटाएं
  8. सभी दोहे बहुत अच्छे और इस दोहे-
    "बात-चीत से धुल गये, मन के सब सन्ताप।
    गुरू-शिष्य अब मिल गये, रहा न पश्चाताप।7।"
    के लिए मेरी विशेष टिप्पणी है कि ‘‘चलो बहुत अच्छा हुआ’’...सादर

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ही सारगर्भित दोहे.आभार.
    कुछ इसी संदर्भ में(दोहा क्र.6) एक प्रयास-
    बात-बात में ज्ञान जतावें,अर्थ बतावे गूढ़
    ऐसों से बच कर रहें , ये होते हैं मूढ़.

    उत्तर देंहटाएं
  10. अटपटे सवाल चटपटे जवाब
    (१)यदि आपको टाइम मिल जाये तो ?
    -तो उसको "टाई"(बाँध कर)करके सम्भाल कर रख लूँगा
    (२) कभी-कभी मेरे हाथ में पैन आता है ,क्या करूँ ?


    -पैन से दूसरों का पेन दूर करने की कोशिश करें

    (३)जंगल में मोर नाचता है,मोरनी क्यों नहीं ?
    -वो नाच देखने में मस्त होकर नाचना ही भूल जाती है
    (४)जोगा सिंह जी मितरां दा नां(नाम)चलदा, क्यों ?
    -क्योंकि पेट्रोल का खर्चा तो आता ही नहीं
    (५) घोड़ी पर बैठकर लड़का क्या सोचता है ?
    -लड़की पहले ही देख रखी है,ससपेंस तो ख़तम हो चुका है
    (६)बच्चे भगवान को याद क्यों नहीं करते ?
    -वे खुद ही भगवान होतें हैं.
    (७)आदमियों के सींग क्यों नहीं होते ?
    -आदमियों के होते तो,महिलाएं भी सींग मांगती.भगवान के पास
    सींग कम थे कहाँ से देते ,बेचारे कई पशु भी सींग बिना रह गए.
    (८)जो किसी ना डरे ,उसे कैसे डराया जाये ?
    -ये काम तो छोटा सा बच्चा ही कर लेगा जी
    (९)सर्दी में पसीना आये तो क्या करें ?
    -जोगिंग छोड़कर पसीना पौंछ लो

    (१०)जोगी जी मुझे किसी से प्यार हो गया है,क्या करूँ ?
    -आपके करने लायक और कुछ बचा ही नहीं
    (more>>>>http://atapatesawalchatpatejawab.blogspot.com)
    aashirwad dene ki kripa karen

    उत्तर देंहटाएं
  11. पूर्ण विराम पूर्ण विराम मचा हुआ कोहराम

    त्राहिमाम चिल्लाते आपके मित्र शिष्य तमाम

    क्षमा बड़न को चाहिये छोटन को अपराध

    अब बंद हो ये तीर चलाना कर निशाना साध

    उत्तर देंहटाएं
  12. "अज्ञानी ही घोंपता, ज्ञानवान को शस्त्र"
    बिलकुल सही कहा है आपने.

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत अच्छे और प्रेरक दोहे।

    उत्तर देंहटाएं

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