"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 17 जुलाई 2011

"प्यार का आधार केवल नेह है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 
स्नेह से बढ़ता हमेशा स्नेह है! 
प्यार का आधार केवल नेह है!! 

शुष्क दीपक स्नेह बिन जलता नही, 
स्नेह बिन पुर्जा कोई चलता नही, 
आत्मा के बिन अधूरी देह है! 
प्यार का आधार केवल नेह है!! 


पीढ़ियाँ हैं आज भूखी प्यार की, 
स्नेह ही तो डोर है परिवार की, 
नेह से ही खिलखिलाते गेह हैं! 
प्यार का आधार केवल नेह है!! 

नेह से बनते मधुर सम्बन्ध हैं, 
कुटिलता से टूटते अनुबन्ध हैं, 
मधुरता सबसे बड़ा अवलेह है! 
प्यार का आधार केवल नेह है!! 

नफरतों के नष्ट अंकुर को करो, 
हसरतों में प्यार का पानी भरो, 
दोस्ती का शत्रु ही सन्देह है! 
प्यार का आधार केवल नेह है!! 

23 टिप्‍पणियां:

  1. शुष्क दीपक स्नेह बिन जलता नही,
    स्नेह बिन पुर्जा कोई चलता नही,
    आत्मा के बिन अधूरी देह है!
    प्यार का आधार केवल नेह है!!

    जीवन का दर्शन समा गया.

    उत्तर देंहटाएं
  2. नेह से बनते मधुर सम्बन्ध हैं,
    कुटिलता से टूटते अनुबन्ध हैं,
    मधुरता सबसे बड़ा अवलेह है!
    प्यार का आधार केवल नेह है!!

    च्यवनप्राश अवलेह में मधुरता न डाली जाये तो कौन चाटे.आपकी प्रस्तुति में भी मधुरता का अवलेह है.
    बार बार चाटने को मन करता है.
    आज की कवि गोष्ठी की रिपोर्ट का इंतजार रहेगा शास्त्री जी.

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुष्क दीपक स्नेह बिन जलता नही,
    स्नेह बिन पुर्जा कोई चलता नही,
    आत्मा के बिन अधूरी देह है!
    प्यार का आधार केवल नेह है!!
    vah keya keha hai aap ne

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही खुबसूरत भाव अभिवयक्ति...

    उत्तर देंहटाएं
  5. नेह से बनते मधुर सम्बन्ध हैं,
    कुटिलता से टूटते अनुबन्ध हैं,
    मधुरता सबसे बड़ा अवलेह है!
    प्यार का आधार केवल नेह है!! bahut achchi baat likhi hai Shastri ji.bina neh ke jeevan me kuch bhi nahi.jindgi har kadam par pyaar ka saath chahti hai.nimantran ke liye abhar apki goshthi ki charcha ka intjaar rahega.

    उत्तर देंहटाएं
  6. सब जीवों में परस्पर यह नेह बना रहे।

    उत्तर देंहटाएं
  7. नफरतों के नष्ट अंकुर को करो,
    हसरतों में प्यार का पानी भरो,

    हर पंक्ति सुभाषित ही तो है ||
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  8. अच्छा गीत, कवि सम्मेलन शानदार हो. पहले से ही बधाई..

    उत्तर देंहटाएं
  9. एक सुंदर सकारात्मक रचना. आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  10. बिल्कुल सही फ़रमाया आपने काश! यह नेह सदैव बना रहे

    उत्तर देंहटाएं
  11. dr.saheb,neh par doctori-yukt shabdabali m rachana prabhawit karane wali rahi sadhuwad

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह वाह बहुत ही सुंदर रचना है

    उत्तर देंहटाएं
  13. शुष्क दीपक स्नेह बिन जलता नही,
    स्नेह बिन पुर्जा कोई चलता नही,
    आत्मा के बिन अधूरी देह है!
    प्यार का आधार केवल नेह है!!
    सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुति.आभार

    उत्तर देंहटाएं
  14. yeh neh hee ek doosre ke qareeb laata hai...

    मेरी नई पोस्ट पे आपका स्वागत् है....
    http://raaz-o-niyaaz.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    उत्तर देंहटाएं
  15. बिल्कुल सही फ़रमाया प्यार का आधार सिर्फ़ नेह है और ज़िन्दगी का भी।

    उत्तर देंहटाएं
  16. जी बिलकुल सच बात! प्यार का आधार तो नेह ही है....

    उत्तर देंहटाएं
  17. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
    नमस्कार,
    आपके ब्लॉग को अपने लिंक को देखने के लिए कलिक करें / View your blog link के "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगपोस्ट डाट काम" के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

    उत्तर देंहटाएं
  18. नेह बरसता रहे....सुन्दर गीत.

    उत्तर देंहटाएं
  19. प्यार का आधार केवल नेह है!!

    नेह ही वो फुल है जो सदैव खुशबु देता हैं ???

    उत्तर देंहटाएं
  20. शास्त्री जी
    वंदना ||
    गोष्ठी का सफल आयोजन
    बधाई ||
    जहाँ -जहाँ साहित्यिक सूखा |
    वहां -वहां शास्त्री जी बरसो ||
    स्वस्थ और खुशहाल रहें नित
    नाती-पोते संग वर्षों हरसो ||

    उत्तर देंहटाएं
  21. पीढ़ियाँ हैं आज भूखी प्यार की,
    स्नेह ही तो डोर है परिवार की,
    नेह से ही खिलखिलाते गेह हैं!
    प्यार का आधार केवल नेह है!!
    बहुत सुन्दर और सटीक पंक्तियाँ! भावपूर्ण रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  22. दोस्ती का शत्रु ही सन्देह है!
    प्यार का आधार केवल नेह है!!

    bahut sunder rachna ....

    उत्तर देंहटाएं
  23. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails