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रविवार, 10 जुलाई 2011

‘‘आ गई वर्षा’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

झुक गईं शाखाएँ स्वागत में तुम्हारे।
आ गई वर्षा हमारे आज द्वारे।।

बुझ गई प्यासी धरा की है पिपासा,
छँट गई व्याकुल हृदय से अब निराशा,
एक अरसे बाद आयी हैं फुहारे।
आ गई वर्षा हमारे आज द्वारे।।

धान के पौधों को जीवन मिल गया है,
धूप से झुलसा चमन अब खिल गया है,
पर्वतों पर गा रहे हैं गान धारे।
आ गई वर्षा हमारे आज द्वारे।।

पंचमी पर नाग-पूजा रंग लाई,
आसमानों में घटा घनघोर छाई,
बह रही पुरवाई की शीतल बयारे।
आ गई वर्षा हमारे आज द्वारे।।

28 टिप्‍पणियां:

  1. Aapke geet se to varsha ritu bhi ithla rahi hogi.uske pyar me itna sunder geet jo likha hai.badhaai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. वर्षा सुन्दर काव्य को और निखार देती है ||
    मन को सुकून देने वाली सुन्दर रचना ||

    बहुत-बहुत बधाई ||

    कम से कम
    रक्षाबंधन से जन्माष्टमी तक
    जाना चाहिए इस रचना को ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. तृप्त नहीं हुई आत्मा --
    चार पंक्तिया और ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. शास्त्री जी !!!
    बहुत ही मनभावन रिमझिम करती मन को शीतल करती बरखा बहार सी शीतल रचना....कोटि कोटि शुभकामनाएं !!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. varsha ritu hai hi aisee kavi man bahut kuchh likhne ko vivash ho hi jata hai.bahut sundar abhivyakti shastri ji.badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  6. प्रिय ब्लोग्गर मित्रो
    प्रणाम,
    अब आपके लिये एक मोका है आप भेजिए अपनी कोई भी रचना जो जन्मदिन या दोस्ती पर लिखी गई हो! रचना आपकी स्वरचित होना अनिवार्य है! आपकी रचना मुझे 20 जुलाई तक मिल जानी चाहिए! इसके बाद आयी हुई रचना स्वीकार नहीं की जायेगी! आप अपनी रचना हमें "यूनिकोड" फांट में ही भेंजें! आप एक से अधिक रचना भी भेजें सकते हो! रचना के साथ आप चाहें तो अपनी फोटो, वेब लिंक(ब्लॉग लिंक), ई-मेल व नाम भी अपनी पोस्ट में लिख सकते है! प्रथम स्थान पर आने वाले रचनाकर को एक प्रमाण पत्र दिया जायेगा! रचना का चयन "स्मस हिन्दी ब्लॉग" द्वारा किया जायेगा! जो सभी को मान्य होगा!

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    हेल्लो दोस्तों आगामी..

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  7. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (11-7-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  8. नाग पंचमी के आगमन की सूचना देती मधुर कविता !

    उत्तर देंहटाएं
  9. "पर्वतों पर गा रहे हैं गान धारे"
    वाह शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ख़ूबसूरत और मधुर कविता! बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  11. भाव अच्छे हैं पर शास्त्री जी, इसमें “रूपचन्द” वाला स्पेशल इफ़ेक्ट नहीं है।

    उत्तर देंहटाएं
  12. बरसात की तरह ही आनंद देती कविता ............

    उत्तर देंहटाएं
  13. अब तो यहाँ भी आ ही गयी वर्षा ...
    सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  14. dr.saheb varsha aa gayi hai to thodi si rajasthan bhej do 48-49 c garami hai thanx

    उत्तर देंहटाएं
  15. जैसे बरखा धरती की आत्मा तृप्त करती है ... आपकी रचना दिल को तृप्त करती है ...

    उत्तर देंहटाएं

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