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बुधवार, 27 जुलाई 2011

"राजनीति के दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

neta ji
 सड़कछाप भी बन गये, अब तो लक्ष्मीदास।
उल्लू बैठा शीश पर, करता भोग-विलास।1।

वाणी में ताकत बढ़ी, देह हुई बेडौल।
सत्ता पाने के लिए, रहा बोलियाँ बोल।2।

आखिर पद मिल ही गया, देकर ऊँचे दाम।
अब अपने सुख के लिए, ही होंगे सब काम।3।

पौत्र और पड़पौत्र भी, अब भोगेंगे राज।
पुश्त और दरपुश्त तक, करना पड़े न काज।4।

यदि घोटाले खुल गये, मैं जाऊँगा जेल।
लेकिन कुछ दिन बाद ही, मिल जाएगी बेल।5।

जनता की होती बहुत, याददास्त कमजोर।
बिसरा देती है सदा, कपटी-कामी-चोर।6।

जितना चाहे लूट ले, तेरी है सरकार।
सरकारी धन-सम्पदा, पर तेरा अधिकार।7।

27 टिप्‍पणियां:

  1. जनता की होती बहुत, याददास्त कमजोर।
    बिसरा देती है सदा, कपटी-कामी-चोर।

    बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut khub....sundr aur satik chitran kiya hai sattaadhariyon ki chhabi ka

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेहद सटीक और शानदार दोहे लिखे है…………बहुत सुन्दर्।

    उत्तर देंहटाएं
  4. waha....bahut khub...har dohaa apne aap mei hi purn hai

    उत्तर देंहटाएं
  5. नमस्कार शास्त्री जी ... करार व्यंग है ... तमाचा मारा है आपने आज की गन्दी राजनीति को ... बहुत खूब ..

    उत्तर देंहटाएं
  6. bahut hi behtreen kataaksh bhare dohe.kaash koi neta to padhe.iski copies banakar mantralyon me baant do.kuch ko to akal aa hi jayegi.

    उत्तर देंहटाएं
  7. यदि घोटाले खुल गये, मैं जाऊँगा जेल।
    लेकिन कुछ दिन बाद ही, मिल जाएगी बेल।
    बिल्कुल सही लिखा है आपने! आज की राजनीती का सुन्दर चित्रण! ज़बरदस्त प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  8. "जितना चाहे लूट ले, तेरी है सरकार।
    सरकारी धन-सम्पदा, पर तेरा अधिकार"

    आदरणीय शास्त्री जी - साधुवाद

    उत्तर देंहटाएं
  9. इनमें जहां एक ओर आज का यथार्थ है वहीं दूसरी ओर आज की परिस्थित पर करा व्यंग्य भी है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. आदरणीय श्री डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी,
    बहुत ही सुन्दर,

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  11. तलवारो को लहराने दो

    तीरों को चल जाने दो

    प्रेम उलहाना शिकवे बंद करो

    अब कलम को आग लगाने दो

    उत्तर देंहटाएं
  12. यही तो बात है। जनता की कमजोर यादाश्त ही तो नेताओं की ताकत है।

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  13. जनता की होती बहुत, याददास्त कमजोर।
    बिसरा देती है सदा, कपटी-कामी-चोर।6।

    सही कहा शास्त्री जी ...हम जनता होती ही बेवकूफ है

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सटीक शाश्त्री जी, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  15. वर्तमान की समग्र सामाजिक अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  16. यथार्थ का चित्रण और सटीक व्यंग है इन उम्दा दोहों में.

    उत्तर देंहटाएं
  17. मिल जाएगी वेळ भुलक्कड़ कहलाऊंगा
    तमाम -उम्र बैठ माल हजम कर जाऊंगा!
    काहे ताऊ "मयंक" तू चाहे जितना लिख ले
    मक्कारों का राज है, तू बस इतना समझ ले

    nice creation sir ji!

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  18. हर तरफ लूट मची है...लूट सके तो लूट...अंत काल जब आएगा...प्राण जायेंगे छूट...

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  19. बहुत बढ़िया जी!
    कभी हमारे ब्लाग पर भी उच्चारण करो जी।

    उत्तर देंहटाएं

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