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सोमवार, 4 जुलाई 2011

"आम डाल के लगते अच्छे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आम पेड़ पर लटक रहे हैं।
पक जाने पर टपक रहे हैं।।
हरे वही हैं जो कच्चे हैं।
जो पीले हैं वो पक्के हैं।।
 इनमें था जो सबसे तगड़ा।
उसे हाथ में मैंने पकड़ा।। 
अपनी बगिया गदराई है।
आमों की बहार आई है।।
मीठे होते आम डाल के।
बासी होते आम पाल के।।
प्राची खुश होकर के बोली।
बाबा इनसे भर लो झोली।।
चूस रहे खुश होकर बच्चे।
आम डाल के लगते अच्छे।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय शास्त्री जी
    नमस्कार !
    अपनी बगिया गदराई है।
    आमों की बहार आई है।।
    .............बहुत खूब, लाजबाब !

    उत्तर देंहटाएं
  2. करीब 20 दिनों से अस्वस्थता के कारण ब्लॉगजगत से दूर हूँ
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर कविता.... बच्चों बड़ों सबको भाते हैं आम

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत मस्त ये पके आम हैं.
    दिल्ली में तो बड़े दाम हैं !

    उत्तर देंहटाएं
  5. bahut achchi baal kavita aur aamon ki tasveeren dekh kar to muh me paani aa gaya.bahut achchi prastuti.

    उत्तर देंहटाएं
  6. sundar kavita ..kintu ab aam khaane aana padega ..prachi ke saath ... Bagicha bahut sundar jaise kavita

    उत्तर देंहटाएं
  7. लगता हैं सुबह ही तोड़े गए हैं ...? अचार देख कर मुंह मैं पानी आ गया ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर रचना....लालच आ गया.

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुबह सुबह आम का सोंधापन याद दिला दिया आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  10. देखना नहीं ........खाना है...........भेजिये...

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह अच्छा विवरण |


    आभार ||

    चोपी से बच के तुम रहना |

    भैया से बोली यह बहना -

    चोपी जो लग गई त्वचा में,

    जले त्वचा, फिर मत कहना ||

    उत्तर देंहटाएं
  12. इतने आम देख कर तो मुँह मे पानी आ गया। सुन्दर रचना। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  13. कुछ कमेंट गूगल बज़ से-
    --
    indu puri goswami - आमों को खाने से ज्यादा मुझे उन्हें पेड़ों पर लटकते हुए देखना बहुत पसंद है.पके अध् पके आमों के फोटो ने तो...........हा हा हा नजर नही हटती. थू-थू4-7 (10:43 पूर्वाह्न को संपादित)
    updesh Saxena - इंदु जी स्वाद के साथ थू-थू क्यों?4-7
    Dr. Danda Lakhnavi - very nice4-7
    indu puri goswami - @उपदेश जी हमारे यहाँ नजर ना लगे इसके लिए 'थू थू' बोला जाता है और उस व्यक्ति,वास्तु पर दूर से थूक के तनिक छींटे मारे जाते हैं जिससे वो बुरी नजर से बचा रहे.हा हा हा10:43 पूर्वाह्न
    atul kast - jai shree krsihan.
    nazar na lage mere ambuwa par.

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  14. सुन्दर मीठे रसीले आम
    खाने को मन करे सुबह शाम
    बहुत ख़ूबसूरत रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  15. आम खाने का असली मजा आम की छाँव में ही आता है.अति सुंदर बाल-गीत.

    उत्तर देंहटाएं
  16. बच्चों को आम चूसते देख कर लालच आ गया...देसी आम भी अब रेयर कमोडिटी बन गये हैं...

    उत्तर देंहटाएं

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