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शनिवार, 23 जुलाई 2011

"ग़ज़ल-...आज कुछ लम्हें चुराने हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



सुहाते ही नहीं जिनको मुहब्बत के तराने हैं
हमारे मुल्क में ऐसे अभी बाकी घराने हैं

जिन्हें भाते नहीं हैं, फूल इस सुन्दर बगीचे के
ज़हन में आज भी ख्यालात उनके तो पुराने हैं

नई दुनिया-नई नस्लें, नई खेती-नई फसलें,
मगर उनको तो अब भी, ढोर ही जाकर चराने हैं

नहीं है अब ज़माना, शान से शासन चलाने का,
नहीं है प्यार गर दिल में, तो अपने भी बिराने हैं

फिज़ाओं ने बहुत तेजी से अपना रूप बदला है,
मुहब्बत के लिए ही आज कुछ लम्हें चुराने हैं

31 टिप्‍पणियां:

  1. चोरी करे ढोल पीटकर वाह जी! चोर हो तो ऐसा...बहुत ख़ूब

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  2. मनमोहक ,बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल.....वाह!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ख़ूबसूरत गज़ल..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर भाव अच्छी रचना |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत खूबसूरत .. उम्दा... आप बहुत ही सुन्दर लिखते है.. शानदार

    उत्तर देंहटाएं
  6. शानदार गजल। एक एक शेर दिल में उतरता हुआ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. क्या बात है शास्त्री जी... वाह. आखिरी पंक्तियों ने गजब कर दिया..

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी पोस्ट की चर्चा कृपया यहाँ पढे नई पुरानी हलचल मेरा प्रथम प्रयास

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी पोस्ट की चर्चा कृपया यहाँ पढे नई पुरानी हलचल मेरा प्रथम प्रयास

    उत्तर देंहटाएं
  11. बेहद ख़ूबसूरत और मनमोहक ग़ज़ल! बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  12. dr.rupchandar ji aapaki ye rachana pasand aayi .esi chori to sabhi ko karani chahiye .esi se desh va jahan ka bhala hoga.

    उत्तर देंहटाएं
  13. dr.saheb namasakar,bahut hi dil ko chhoo lenewali aaj ke anuroop rachana

    उत्तर देंहटाएं
  14. नई दुनिया-नई नस्लें, नई खेती-नई फसलें,
    मगर उनको तो अब भी, ढोर ही जाकर चराने हैं
    क्या बात है शास्त्री जी... वाह.सुंदर ग़ज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  15. सही है नस्ले नयी फ़सले नयी पर नेता वही पुराने हैं

    उत्तर देंहटाएं
  16. addbhut bahut behtreen ghazal.antim pankti ne to poora saar hi spasht kar diya.

    उत्तर देंहटाएं
  17. फिज़ाओं ने बहुत तेजी से अपना “रूप” बदला है,
    मुहब्बत के लिए ही आज कुछ लम्हें चुराने हैंफिज़ाओं ने बहुत तेजी से अपना “रूप” बदला है,
    मुहब्बत के लिए ही आज कुछ लम्हें चुराने हैं

    waah waah waah...!

    उत्तर देंहटाएं
  18. नई दुनिया-नई नस्लें, नई खेती-नई फसलें,
    मगर उनको तो अब भी, ढोर ही जाकर चराने हैं

    नहीं है अब ज़माना, शान से शासन चलाने का,
    नहीं है प्यार गर दिल में, तो अपने भी बिराने हैं

    निशब्द कर देने वाली पंक्तियाँ ............बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं

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