"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 12 जुलाई 2011

"पर्वत से शृंगार उतर कर मैंदानों में आया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

♥ प्लम ♥
गया आम का मौसम,
प्लम बाजारों में अब छाया।
इनको देख-देख कर देखो,
सबका मन ललचाया।।
 
लाल-लाल हैं जितने पोलम,
वो हैं खट्टे-मीठे,
लेकिन जो महरून रंग के,
वो लगते हैं मीठे,
पर्वत से शृंगार उतर कर,
मैदानों में आया।

अल्मौड़ा, चौखुटिया,
नैनीताल और चम्पावत,
प्लम के पेड़ों के बागीचे,
फैले हैं बहुतायत,
हरे-भरे इन वृक्षों ने है,
मन को बहुत लुभाया। 
मार शीत की झेल-झेल,
शीतल फल हुए रसीले,
बारिश का पानी पीकर,
हो जाते नीले-पीले,
बच्चों और बड़ों ने इनको
बहुत चाव से खाया।  

20 टिप्‍पणियां:

  1. "ऐसी सुन्दर पंक्तियाँ प्यारी
    सुन्दर चित्र दिखाया,
    रंग-रसीले फलों को देखा
    मुह में पानी आया."

    सुन्दर गीत सर,
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  2. इतने कमाल के चित्र और आपका वर्णन इतना जोरदार है की पानी आ रहा है मुंह हैं ... रसीला गीत है ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. dr.saheb itane fal dekhkar unh me paani aaya,indar dev ne surat garh me jal barasaya badhayi

    उत्तर देंहटाएं
  4. आम के मौसम को इतनी जल्दी विदा न कीजियेगा शास्त्री जी,
    लगता है आपने आम दबा कर खा लिए हैं,मन भर गया है शायद.

    उत्तर देंहटाएं
  5. मनमोहक ललचाऊ आलूचे दिखला दिए सशरीर कविता में आलूचे हैं या आलूचों में कविता है .दोनों तरफ से सौन्दर्य का वर्षंन .

    उत्तर देंहटाएं
  6. आदरणीय शास्त्री जी - सजीव चित्रण - कोई खाए बिना रह ही नहीं सकता.

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्लम के बारे में जानकारी और लुभावने चित्र बहुत अच्छे लगे ..

    उत्तर देंहटाएं
  8. der se padhne ki kshama chahti hoon.plam ki jaankari se susajjit bal kavita bahut bhaai.aabhar.

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर और प्यारा-सा गीत...

    उत्तर देंहटाएं
  10. प्लम को हम लोग आलूबुखारा कहते थे...बहुत बढ़िया रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  11. अभी हमारी पहुँच से दूर हैं शास्त्री जी ...एक टोकरा इधर भी पार्सल किया होता ...?

    उत्तर देंहटाएं
  12. स्वादिष्ट, मीठे और रसीले प्लम देखकर मुँह में पानी आ गया! सुन्दर प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  13. इतनी सुन्दर कविता--इतने सुन्दर फोटो. मन ललचा गया..

    उत्तर देंहटाएं
  14. सुन्दर कविता-- सुन्दर फोटो.आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  15. यह फल तो हमारे मैदानो में होता नहीं आप बताएं कि हमें केसे उपलब्ध हो

    उत्तर देंहटाएं
  16. ये आलूचा गान ,प्लम सोंग एक मर्तबा फिर पढ़ा .आभार .

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails