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सोमवार, 25 जुलाई 2011

“पथ निखर ही जाएगा” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

आज अपना हम सँवारें, कल सँवर ही जायेगा
आप सुधरोगे तो सारा, जग सुधर ही जाएगा
 
जो अभी कुछ घट रहा है, वही तो इतिहास है
देखकर नक्श-ए-कदम को, रथ उधर ही जाएगा
 
रास्ते कितने मिलेंगे, सोचकर पग को बढ़ाना
आओ मिलकर पथ बुहारें, पथ निखर ही जाएगा
 
एकता और भाईचारे में, दरारें मत करो
वरना ये गुलदान पल भर में, बिखर ही जाएगा
 
चमन में फूलों का सबको “रूप” भाता है बहुत
गर मिलेगी गन्ध तो, भँवरा पसर ही जाएगा

24 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. बहुत ही उम्दा और हाज के हालात मे सही बैठने वाली गजल

    उत्तर देंहटाएं
  3. एकता और भाईचारे में, दरारें मत करो
    वरना ये गुलदान पल भर में, बिखर ही जाएगा

    बहुत सुंदर, प्रेरणादायी ग़ज़ल।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज अपना हम सँवारें, कल सँवर ही जायेगा
    आप सुधरोगे तो सारा, जग सुधर ही जाएगा

    जरूरत खुद के सुधरने की है...
    बहुत बढ़िया...

    उत्तर देंहटाएं
  5. रास्ते कितने मिलेंगे, सोचकर पग को बढ़ाना
    आओ मिलकर पथ बुहारें, पथ निखर ही जाएगा... बहुत सुन्दर शब्दों से भाव को पिरोया है .आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  6. रास्ते कितने मिलेंगे, सोचकर पग को बढ़ाना
    आओ मिलकर पथ बुहारें, पथ निखर ही जाएगा
    एकता और भाईचारे में, दरारें मत करो
    वरना ये गुलदान पल भर में, बिखर ही जाएगा..
    बहुत सुन्दर और सटीक पंक्तियाँ! ख़ूबसूरत चित्र के साथ लाजवाब रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्रेरणा दायी कविता पर मनन किया जाए तो निश्चय ही भविष्य को संवारा जा सकता है.

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  8. आप सुधरोगे तो सारा, जग सुधर ही जाएगा
    बिल्कुल सही

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  9. पहली दो पंक्तियां पूरी गजल की जान हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  10. जो अभी कुछ घट रहा है, वही तो इतिहास है
    देखकर नक्श-ए-कदम को, रथ उधर ही जाएगा

    रास्ते कितने मिलेंगे, सोचकर पग को बढ़ाना
    आओ मिलकर पथ बुहारें, पथ निखर ही जाएगा
    samajik chintan, desh ke nav nirman ko disha dene wali..umda ghazal...hardik badhai ke sath

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  11. शानदार था भूत, भविष्य भी महान है,
    यदि सुधार लें आप जो वर्तमान है।

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  12. रास्ते कितने मिलेंगे, सोचकर पग को बढ़ाना
    आओ मिलकर पथ बुहारें, पथ निखर ही जाएगा

    sunder ghazal

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  13. शानदार प्रस्तुति ||
    बधाई ||

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  14. सर ,
    मैंने 'अमृत कलश ' नाम से एक ब्लॉग अपनी मम्मी ज्ञानवती सक्सेना किरण की बाल उपयोगी रचनाओं को सब तक पहुचाने के लिए छोटा सा प्रयत्न किया है |कृपया ब्लॉग पर आकार अनुगृहित करें |
    आशा

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  15. वाह वाह सर...
    बहुत ही उम्दा बातें कही आपने...
    सादर....

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  16. सकारात्मक सोच के साथ ही अच्छी प्रस्तुति ................आभार

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  17. एकता और भाईचारे में, दरारें मत करो
    वरना ये गुलदान पल भर में, बिखर ही जाएगा
    सुन्दर संदेश देती शानदार रचना।

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  18. maaf kijiye padhne me der ho gayi.bahut bahut uttam rachna hai yah to.jitni taareef karo kam hai.aapko badhaai.

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