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शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

"लगे पहरे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


पहले पाबन्दियाँ थीं हँसने में, अब सिसकने में भी लगे पहरे।
पहले बदनामियाँ थीं छिपने में, अब चमकने में भी लगे पहरे।

कितने पैबन्द हैं लिबासों में, जिन्दगी बन्द चन्द साँसों मे,
पहले हदबन्दियाँ थीं चलने में, अब ठहरने में भी लगे पहरे।

शूल बिखरे हुए हैं राहों मे, नेक-नीयत नहीं निगाहों में
पहले थीं खामियाँ सँवरने में, अब उजड़ने में भी लगे पहरे।

अब हवाएँ जहर उगलतीं हैं, अब फिजाएँ कहर उगलतीं हैं,
पहले गुटबन्दियाँ थीं कुनबे में, अब तो महकनें में भी लगे पहरे।

रूपजबसे हुआ है आवारा, तबसे बदनाम हुआ गलियारा,
पहले गुमनामियाँ थीं रहने में, अब चहकने में भी लगे पहरे।

26 टिप्‍पणियां:

  1. "अब हवाएँ जहर उगलतीं हैं, अब फिजाएँ कहर उगलतीं हैं,
    पहले गुटबन्दियाँ थीं कुनबे में, अब तो महकनें में भी लगे पहरे।"....
    khoobsurat kavita... samaik muddo par vimarsh !

    उत्तर देंहटाएं
  2. ‘रूप’ जबसे हुआ है आवारा, तबसे बदनाम हुआ गलियारा

    'रूप' आवारा हो गया है,यह तो बड़े सोच की बात है,भाई जी.
    भाभी जी से शिकायत करनी पड़ेगी अब तो.

    उत्तर देंहटाएं
  3. कितने पैबन्द हैं लिबासों में, जिन्दगी बन्द चन्द साँसों मे,
    पहले हदबन्दियाँ थीं चलने में, अब ठहरने में भी लगे पहरे।
    .
    वाह क्या बात है. कमाल का लिख रहे हैं

    उत्तर देंहटाएं
  4. mausam ne logo ko tara hai
    manav jindagi se hara hai
    sarkaar kya jaane garibo ki musibaat
    kyoki usne put path ki jindgi ka nahi dekha najara hai
    chhotawriters.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी रचना तेताला पर भी है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  6. शूल बिखरे हुए हैं राहों मे, नेक-नीयत नहीं निगाहों में
    पहले थीं खामियाँ सँवरने में, अब उजड़ने में भी लगे पहरे।
    बहुत ही बढ़िया !

    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

    उत्तर देंहटाएं
  7. जिदगी बंद है चन्द सांसों में--
    भले, कुछ काम करले तू
    जरा सा नाम कर ले तू
    खुदा के घर भी जाना है --
    कुछ इंतजाम कर ले तू ||

    कभी-कभी अचानक
    कुछ बड़ी बातें भी
    कह जाता हूँ टिप्पणी में --
    देखिये न तुक मिलाते-मिलाते --

    कुछ धर्म-कर्म करने का, (इंतजाम कर लेने की बात)
    सन्देश ही आ गया
    अंतिम पंक्ति में ||

    उत्तर देंहटाएं
  8. कितने पैबन्द हैं लिबासों में, जिन्दगी बन्द चन्द साँसों मे,
    पहले हदबन्दियाँ थीं चलने में, अब ठहरने में भी लगे पहरे

    ैया बात है शास्त्री जी! हर जगह पहरे ही पहरे...वाकई

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (02.07.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं
  10. विकास की अंधी दौड़ में निमग्न आज व्यक्ति को कहीं भी तस्सली नहीं है पहरे तो लगेंगे ही

    उत्तर देंहटाएं
  11. ‘रूप’जब से हुआ है आवारा,
    तबसे बदनाम हुआ गलियारा,
    पहले गुमनामियाँ थीं रहने में,
    अब चहकने में भी लगे पहरे।
    क्या बात कही सर ! बहुत खूब ! " सहरा -ए- मुहब्बत निगाहों में ,अब निगाहों पर लगे पहरे " माफ़ी चाहेंगे गुश्ताखी की / बाग- बाग हो गया दिल ,शुक्रिया जी /

    उत्तर देंहटाएं
  12. कितने पैबन्द हैं लिबासों में, जिन्दगी बन्द चन्द साँसों मे,
    पहले हदबन्दियाँ थीं चलने में, अब ठहरने में भी लगे पहरे
    बहुत बढ़िया..
    धन्यवाद !
    http://hbfint.blogspot.com/2011/07/blog-post_01.html

    उत्तर देंहटाएं
  13. पहले गुमनामियाँ थीं रहने में,
    अब चहकने में भी लगे पहरे।

    बेहद खूबसूरत ग़ज़ल !

    उत्तर देंहटाएं
  14. पहले पाबन्दियाँ थीं हँसने में, अब सिसकने में भी लगे पहरे।
    पहले बदनामियाँ थीं छिपने में, अब चमकने में भी लगे पहरे।
    bahut sunder bhav liye gahan aur sunder abhibyakti.dil ko choo gai.mayankji aapki to har rachanaa nirali hoti hai,padhkar bahut achcha lagataa hai,badhaai aapko.

    उत्तर देंहटाएं
  15. अब हवाएँ जहर उगलतीं हैं, अब फिजाएँ कहर उगलतीं हैं.
    एकदम सही.यही तो है चारो तरफ.

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सुंदर, क्या बात है।

    पहले गुमनामियाँ थीं रहने में,
    अब चहकने में भी लगे पहरे।

    उत्तर देंहटाएं
  17. शूल बिखरे हुए हैं राहों मे, नेक-नीयत नहीं निगाहों में
    पहले थीं खामियाँ सँवरने में, अब उजड़ने में भी लगे पहरे।

    यह पहरों का संसार निराला है जनाब
    यहाँ साँसों पर भी पहरे लगे है
    और बातो पर भी पहरे .....

    उत्तर देंहटाएं

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