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रविवार, 24 जुलाई 2011

"नाराज नहीं होकर जाना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



हँसी-खुशी से आये हो, नाराज नहीं होकर जाना
जीवन के अनुरक्त तरानों को, खुश हो करके गाना

मंजिल को यदि पाना है तो, चलते ही रहना होगा
मत होना निराश, पथ की बाधाओं से मत घबराना

चलने का है का नाम ज़िन्दगी, रुकना मौत कहाता है
बहती नदियों जैसा जीवन ही तुमको है अपनाना

बुरे-भले को बहती धारा ही तो निर्मल करती है
दुर्गन्धों को अपने संसर्गों में लाकर महकाना

रूप और मालिन्य हटाकर अपने रँग में रँग देना
जीवन का सन्देश तुम्हें है सारे जग को सिखलाना 

33 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर संदेश देती कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर सन्देश ||

    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपने दिल खुश कर दिया
    चमन मे फ़िर फ़ूल महक रहे हैं
    परिंदे डालियो मे फ़िर चहक रहे हैं
    संदेश हवाओं मे रहा है तैर

    जीवन भर का साथ छुड़ा सकता है

    पल भर का बैर

    कि भैय्या आल इज वेल

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर शिक्षा देती ग़ज़ल सर....
    सादर....

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहद शानदार लाजवाब गज़ल .... एक-एक शे’र लाजवाब।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत प्रेरक प्रस्तुति....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुन्दर सन्देश के लिए बहुत बहुत आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 26-07-2011 को चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर मंगलवारीय चर्चा में भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  9. चलने का है का नाम ज़िन्दगी, रुकना मौत कहाता है
    बहती नदियों जैसा जीवन ही तुमको है अपनाना

    जो गति है, तो जीवन है।
    बहुत अच्छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  10. अच्छा सन्देश दिया आपने ...मन से मेल धो देना ही न्याय संगत है ..

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  11. चलने का है का नाम ज़िन्दगी, रुकना मौत कहाता है
    बहती नदियों जैसा जीवन ही तुमको है अपनाना
    जीवन पथ पर आगे बढने की प्रेरणा देती सुन्दर रचना। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुन्दर सन्देश ||
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बुरे-भले को बहती धारा ही तो निर्मल करती है
    दुर्गन्धों को अपने संसर्गों में लाकर महकाना
    क्या पते की बात कही है सर अपने / अंतर्मन को छूते,
    काव्य सृजन ... प्रेरणा के प्रवाह से लगते हैं ../ शुक्रिया जी /

    उत्तर देंहटाएं

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