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शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

"बालगीत-...गिजाई..." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

छमछम-छमछम वर्षा आई।

रेंग रही हैं बहुत गिजाई।।
 
पेड़ों की जड़ के ऊपर भी,
कच्ची मिट्टी में भूपर भी,
इनका झुण्ड पड़ा दिखलाई।
 
ईश्वर के कैसे कमाल हैं,
ये देखो ये लाल-लाल हैं,
सीधी-सरल बहुत हैं भाई।

  
भोली-भालीकितनी प्यारी,
धवल-धवल तन पर हैं धारी,
कितनी सुन्दर काया पाई।

14 टिप्‍पणियां:

  1. गिजाई पर बाल गीत.अनूठा प्रयोग
    सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. गीत तो बहुत सुन्दर है मगर हमे तो चित्र मे देखकर भी डर लगता है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. लागत बच्चा कौन सा, विषय कठिन बतलाव,
    शास्त्री जी के पास जा, ले ले तनिक सुझाव |

    ले ले तनिक सुझाव, गिजाई कान-खजूरा,
    आम चुकंदर प्यार, मिलेगा सब-कुछ पूरा |

    कर रविकर परनाम, कहत अब किस्मत जागत,
    गुरु -पूर्णिमा आज , आपके चरणन लागत ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. एक लालबिलौटी भी हुआ करती थी...चटक लाल रंग की...मखमली...बरसात में निकलती थी...बच्चों को बहुत अच्छी लगती थी...

    उत्तर देंहटाएं
  5. नज़र सुंदर हो तो सारी दुनियाँ ही सुंदर है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. गीत तो बहुत सुन्दर है मगर हमे तो चित्र मे देखकर भी डर लगता है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. है तो बहुत प्यारा बाल गीत, पर बचपन में मुझे इस जीव से बहुत डर लगता था।

    उत्तर देंहटाएं
  8. है तो बहुत प्यारा बाल गीत, पर बचपन में मुझे इस जीव से बहुत डर लगता था।

    उत्तर देंहटाएं
  9. सबका चश्मा ज़ुदा-ज़ुदा देखा,
    रंग चेहरे का अलहदा देखा,
    इशरते-रूप गिजाई के दम,
    वन्दना जी को ग़मज़दा देखा।
    (इशरते-रूप= रूप की ख़ुशी अर्थात्‌ शास्त्री जी की ख़ुशी)

    उत्तर देंहटाएं
  10. aapke baal geet hamesha se achche lagte hai...... lekin ye keedhe mujeh dur se rengte huye dekhna hi achcha lagta hai... inke hazaro pair dekh ke to mujhe to jhurjhri si hone lagti hai... :-)

    उत्तर देंहटाएं
  11. gijaai ke upar likha geet jindagi me pahli baar padhrahi hoon.is jeev ko main pasand nahi karti par aapki kavita damdaar hai.bachchon ko bahut achchi lagegi aur is jeev se bhi avgat honge.

    उत्तर देंहटाएं

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